रतलाम / बालाघाट। मध्यप्रदेश के सैलाना से भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश्वर डोडियार ने बालाघाट जिले के विभिन्न बैगा आदिवासी गांवों का दौरा कर वहां की जमीनी स्थिति का जायजा लिया। हाल ही में कथित बीमारी और महामारी के बीच बच्चों की मौत की खबरों के बाद गांवों में पहुंचे विधायक ने मृत बच्चों के परिवारों से मुलाकात की और बस्तियों में स्वास्थ्य, पेयजल, खाद्यान्न तथा आवागमन की व्यवस्थाओं को बेहद चिंताजनक बताया।
विधायक डोडियार के अनुसार कई बैगा परिवार आज भी ऐसी परिस्थितियों में जीवन जीने को मजबूर हैं, जहां पीने के पानी के लिए पत्थरों के नीचे और पेड़ों की जड़ों के आसपास से पानी निकालकर उसका इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका आरोप है कि कई बस्तियों तक न तो समुचित सड़क है और न ही बीमार मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने की पर्याप्त व्यवस्था। भोजन और पोषण की स्थिति भी गंभीर बताई गई है।
डोडियार ने दावा किया कि इन क्षेत्रों में करीब 30 बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि सैकड़ों बच्चों की हालत चिंताजनक बताई जा रही है। उन्होंने कुपोषण, कम वजन, मलेरिया, मीजल्स सहित विभिन्न बीमारियों को बच्चों की गंभीर स्थिति के पीछे प्रमुख कारणों में बताया। हालांकि मौतों और बीमारी के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि तथा विस्तृत जांच आवश्यक है।
विधायक ने आरोप लगाया कि विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा के लिए सरकार द्वारा संचालित योजनाओं, आंगनवाड़ी पोषण आहार, उचित मूल्य दुकान के राशन, पेयजल, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए उपलब्ध संसाधनों का लाभ जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने व्यवस्था में भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि संवैधानिक अधिकारों और सरकारी योजनाओं का लाभ आदिवासी परिवारों तक नहीं पहुंच रहा है तो यह बेहद गंभीर प्रशासनिक विफलता है।
डोडियार ने कहा कि जीवन का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक नागरिक को प्राप्त है, इसलिए किसी भी बच्चे को इलाज, पोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में जीवन से वंचित नहीं किया जा सकता।
उन्होंने सरकार और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं से पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों एवं दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने तथा गंभीर रूप से बीमार बच्चों को तत्काल एम्स अथवा देश के प्रमुख अस्पतालों में उपचार उपलब्ध कराने की मांग की।
विधायक ने प्रदेश सरकार के विकास और आदिवासी कल्याण से जुड़े मंत्रियों की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि यदि सरकार आदिवासी बच्चों को मूलभूत सुविधाएं और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था उपलब्ध कराने में विफल रही है तो जिम्मेदार मंत्रियों को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।
बालाघाट के बैगा अंचल से सामने आई इन चिंताजनक परिस्थितियों ने एक बार फिर आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण, पेयजल, सड़क और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पूरे मामले में प्रशासन की जांच और आधिकारिक रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट होगा कि बच्चों की मौत के वास्तविक कारण क्या हैं और सरकारी व्यवस्थाएं धरातल पर कितनी प्रभावी हैं।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत