रतलाम/बालाघाट। मध्यप्रदेश के सैलाना विधानसभा क्षेत्र से भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश्वर डोडियार ने बालाघाट जिले के बैहर विधानसभा क्षेत्र में बैगा आदिवासी परिवारों की बदहाल स्थिति को लेकर सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विधायक ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर मछुरदा, कुंडेक्सा, बोंदारी, अडोरी सहित करीब 40 गांवों की स्थिति देखी और बच्चों की लगातार हो रही मौतों, कुपोषण, मलेरिया तथा मीजल्स-रूबेला संक्रमण को लेकर चिंता जताई है।
डोडियार ने 24 अगस्त 2026 को क्रमांक 612/VIP/2026 के माध्यम से राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतरसिंह जी आर्य, मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और तत्काल राहत एवं स्वास्थ्य व्यवस्था की मांग की है।
30 से ज्यादा बच्चों की मौत का दावा, सैकड़ों की हालत नाजुक
विधायक के पत्र के अनुसार बैहर विधानसभा क्षेत्र के बिरसा विकासखंड के प्रभावित गांवों में बैगा जनजाति के मासूम बच्चे और परिवार मलेरिया, मीजल्स-रूबेला, बुखार, सर्दी-खांसी, चर्मरोग, स्कैबीज सहित अन्य संक्रमणजनित एवं मौसमी बीमारियों से प्रभावित हैं।
क्षेत्र से प्राप्त जानकारी के आधार पर डोडियार ने 30 से ज्यादा बैगा बच्चों की मौत होने का दावा किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि सैकड़ों बच्चों की हालत नाजुक बताई जा रही है। विधायक ने सरकारी आंकड़ों और क्षेत्र से मिल रही जानकारी में अंतर होने की बात कहते हुए प्रत्येक बाल मृत्यु का स्वतंत्र और निष्पक्ष सत्यापन कराने की मांग की है।
पत्थरों और पेड़ों की जड़ों के नीचे से पानी निकालने को मजबूर परिवार
विधायक के दौरे के दौरान सामने आई तस्वीरें और उनके द्वारा बताई गई जमीनी स्थिति बेहद चिंताजनक है। डोडियार का कहना है कि कई बैगा परिवारों को पीने के पानी के लिए पत्थरों के नीचे अथवा पेड़ों की जड़ों के आसपास से पानी निकालकर पीना पड़ रहा है।
कई गांवों में सड़क और आवागमन की स्थिति भी खराब बताई गई है। गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को अस्पताल तक ले जाने के लिए पर्याप्त सड़क और परिवहन व्यवस्था नहीं होने का आरोप लगाया गया है। भोजन, पोषण, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण बच्चों की स्थिति और गंभीर होने की बात विधायक ने कही है।
सरकारी योजनाओं के लाभ पर भी उठाए सवाल
डोडियार ने आरोप लगाया कि विशेष रूप से कमजोर एवं पिछड़ी बैगा जनजाति के लिए संचालित योजनाओं का अपेक्षित लाभ जमीन पर नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने आंगनवाड़ी का पोषण आहार, टेक-होम राशन, उचित मूल्य दुकान का राशन, पेयजल, आवास, सड़क, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति की विशेष जांच कराने की मांग की है।
विधायक ने सवाल उठाया कि यदि सरकार द्वारा आदिवासी क्षेत्रों के लिए योजनाएं और बजट उपलब्ध कराया जा रहा है तो उसका वास्तविक लाभ बैगा बस्तियों तक क्यों नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने पूरे मामले में भ्रष्टाचार, लापरवाही और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
₹20 हजार की सहायता को बताया अपर्याप्त, मांगा ₹10 लाख मुआवजा
डोडियार ने अपने पत्र में कहा कि प्रभावित क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के दौरे के बावजूद पीड़ित परिवारों की वास्तविक स्थिति के अनुरूप पर्याप्त राहत नहीं पहुंची। उन्होंने ₹20,000 की घोषित आर्थिक सहायता को अपर्याप्त बताते हुए प्रत्येक मृत बच्चे के परिवार को कम से कम ₹10 लाख का मुआवजा और पुनर्वास पैकेज देने की मांग की है।
सिर्फ तबादला कार्रवाई नहीं, जिम्मेदारी तय हो
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर भी विधायक ने सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार जिला मलेरिया अधिकारी का स्थानांतरण तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को जिला टीकाकरण अधिकारी के प्रभार से हटाना मात्र प्रशासनिक कार्रवाई है। डोडियार का कहना है कि इतने गंभीर मामले में यह पता लगाया जाना चाहिए कि बच्चों की मौतों के लिए वास्तविक रूप से कौन जिम्मेदार है।
उन्होंने अधिकारियों की कथित लापरवाही और पूरे स्वास्थ्य तंत्र की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
अधिकारियों के मिठाई बांटने वाले फोटो पर भी सवाल
विधायक ने अपने पत्र में एक अन्य संवेदनशील मुद्दे का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौतों के बाद जिला टीकाकरण अधिकारी का प्रभार दिए जाने पर संबंधित अधिकारियों द्वारा मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं देने का फोटो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ। डोडियार ने कहा कि एक तरफ बैगा परिवार अपने बच्चों को खोकर शोक में हैं और दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारियों के इस तरह खुशी मनाते दिखाई देने से पीड़ित परिवारों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की भी जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।
एम्स या बड़े अस्पतालों में तत्काल इलाज की मांग
विधायक ने मांग की है कि प्रभावित सभी गांवों में विशेषज्ञ डॉक्टरों, बाल रोग विशेषज्ञों, मलेरिया एवं संक्रामक रोग विशेषज्ञों की टीमें तत्काल भेजी जाएं। 24 घंटे स्वास्थ्य शिविर और मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालित की जाए।
सभी बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं की स्वास्थ्य जांच कराने, गंभीर एवं कुपोषित बच्चों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने तथा जरूरतमंद बच्चों को एम्स अथवा देश के प्रमुख अस्पतालों में भर्ती कर बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
पानी की जांच से लेकर अधूरे आवासों तक जांच की मांग
डोडियार ने प्रभावित गांवों में पेयजल की तत्काल व्यवस्था कराने और पानी के नमूनों की प्रयोगशाला जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही आंगनवाड़ी सेवाओं, पोषण आहार और टेक-होम राशन की विशेष जांच की मांग भी की गई है।
बैगा परिवारों के अधूरे प्रधानमंत्री आवासों की जांच कर उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा कराने तथा अनियमितता मिलने पर सरपंच, सचिव, ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
उन्होंने प्रभावित क्षेत्र में सड़क, पुलिया, बिजली और पेयजल के लिए विशेष पैकेज स्वीकृत करने तथा शासन की सभी योजनाओं के लिए विशेष शिविर लगाकर पात्र परिवारों को तत्काल लाभ देने की मांग की है।
अनुच्छेद 21 का हवाला, सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग
कमलेश्वर डोडियार ने कहा कि यह केवल स्वास्थ्य विभाग की समस्या नहीं बल्कि मासूम आदिवासी बच्चों के जीवन और मानवाधिकार से जुड़ा गंभीर मानवीय संकट है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी बच्चे को इलाज, पोषण, स्वच्छ पानी और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में जीवन से वंचित नहीं किया जा सकता।
उन्होंने मुख्यमंत्री से स्वयं अथवा अपने प्रतिनिधि के माध्यम से प्रभावित बैगा परिवारों से मिलने और पूरे मामले की मुख्यमंत्री स्तर से नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है।
डोडियार ने प्रदेश सरकार के विकास एवं आदिवासी कल्याण से जुड़े मंत्रियों की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए जिम्मेदार मंत्रियों के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
अब सरकार की अग्निपरीक्षा
बालाघाट के बैगा अंचल से सामने आए ये आरोप यदि जांच में सही पाए जाते हैं तो यह केवल स्वास्थ्य विभाग की विफलता नहीं बल्कि पोषण, पेयजल, सड़क, आवास और आदिवासी कल्याण योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर भी बड़ा सवाल होगा। फिलहाल विधायक द्वारा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के बाद इस पूरे मामले में सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिक गई हैं।
बड़ा सवाल यही है—अगर बैगा बस्तियों में बच्चे लगातार बीमार पड़ रहे थे और मौतें हो रही थीं, तो समय रहते स्वास्थ्य और प्रशासनिक तंत्र वहां क्यों नहीं पहुंचा? अब इस सवाल का जवाब जांच और सरकार की कार्रवाई से ही सामने आएगा।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत