रतलाम / धामनोद । भाजपा शासनकाल में रतलाम ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की विकास व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली तस्वीर सामने आई है।
रतलाम ग्रामीण विधायक मथुरालाल डामर के धामनोद क्षेत्र में केसरपुरा से दिवेलखेड़ी तक सड़क की बदहाल स्थिति से ग्रामीण लंबे समय से परेशान हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की हालत इतनी खराब है कि रोजाना आवागमन करने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन शिकायतों और आवेदनों के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
ग्रामीणों के मुताबिक सड़क की समस्या को लेकर उन्होंने कलेक्टर कार्यालय में अनेक बार आवेदन दिए हैं। हर बार उम्मीद रही कि अब समस्या का समाधान होगा, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आवेदन देने का सिलसिला चलता रहा और सड़क की हालत जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीण ने बताया कि उन्होंने स्वयं कई बार कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों को आवेदन दिए। इतना ही नहीं, सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशु निनामा को साथ लेकर भी अधिकारियों के समक्ष समस्या को लेकर आवेदन दिया गया, वहीं अन्य स्तरों पर भी समस्या उठाई गई। बावजूद इसके ग्रामीणों को अब तक राहत नहीं मिली।
जनप्रतिनिधियों के सामने बड़ा सवाल
केसरपुरा क्षेत्र दिवेल पंचायत से जुड़ा है और ग्रामीणों का आवागमन रतलाम ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत होता है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय पंचायत स्तर पर भी सड़क की समस्या को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई। सड़क की बदहाली के कारण रोजमर्रा के आवागमन के साथ किसानों और अन्य ग्रामीणों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
अब सवाल सीधे रतलाम ग्रामीण विधायक मथुरालाल डामर और स्थानीय प्रशासन से पूछा जा रहा है कि जब क्षेत्र के ग्रामीण लगातार आवेदन देकर सड़क की समस्या बता रहे हैं, तो आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
भाजपा शासनकाल में विकास के दावों के बीच रतलाम ग्रामीण क्षेत्र के ग्रामीण यदि आज भी खराब सड़क के लिए आवेदन लेकर अधिकारियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, तो यह जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के लिए गंभीर सवाल है।
अनेक आवेदन... फिर भी सड़क बदहाल!
ग्रामीणों का कहना है कि उनके पास अलग-अलग तारीखों में दिए गए आवेदनों का रिकॉर्ड मौजूद है। सड़क की वर्तमान स्थिति के फोटो भी सामने रखे जा रहे हैं। ऐसे में अब केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि मौके पर पहुंचकर सड़क की वास्तविक स्थिति देखने और स्थायी समाधान करने की जरूरत है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल स्थल निरीक्षण कराया जाए, पूर्व में दिए गए आवेदनों की जांच की जाए और केसरपुरा–दिवेलखेड़ी सै सैलाना तक मार्ग निर्माण की ठोस कार्ययोजना बनाई जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल—अनेक बार आवेदन देने के बाद भी अगर ग्रामीणों की आवाज नहीं सुनी गई, तो आखिर उनकी सड़क की समस्या का समाधान कब होगा?
ग्रामीणों की निगाह अब प्रशासन और रतलाम ग्रामीण विधायक मथुरालाल डामर की ओर है। देखना होगा कि इस गंभीर जनसमस्या पर जिम्मेदार कब तक संज्ञान लेते हैं और कब ग्रामीणों को बदहाल सड़क से राहत मिलती है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत