रतलाम/बाजना। भाई-बहन के पवित्र प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन को लेकर रतलाम जिले के आदिवासी अंचल बाजना में उत्साह का माहौल दिखाई दे रहा है। पर्व की तैयारियों को लेकर बाजना सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। राखी, मिठाई, कपड़े और पूजा सामग्री की दुकानों पर दिनभर लोगों की आवाजाही बनी हुई है। दूर-दराज के गांवों से भी ग्रामीण परिवार खरीदारी के लिए बाजना पहुंच रहे हैं।
आदिवासी अंचल में रक्षाबंधन का पर्व अपनी अलग ही सादगी और पारंपरिक रंग के साथ मनाया जाता है। बहनें अपने भाइयों की कलाई पर प्रेम और विश्वास की राखी बांधने के लिए उत्साहित हैं, वहीं भाई भी बहनों को उपहार देने की तैयारियों में जुटे हैं। कई परिवारों में घर पर ही पारंपरिक तरीके से पूजा की तैयारियां की जा रही हैं।
बाजना क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि परिवार और रिश्तेदारों के एक साथ आने का अवसर भी माना जाता है। रोजगार या अन्य कारणों से बाहर रहने वाले भाई-बहनों के घर लौटने से गांवों में भी चहल-पहल बढ़ गई है। बहनों के मायके पहुंचने और भाइयों की कलाई पर राखी सजाने की परंपरा आज भी यहां पूरी आत्मीयता के साथ निभाई जाती है।
बाजना के बाजारों में इस बार पारंपरिक राखियों के साथ बच्चों और युवाओं की पसंद को ध्यान में रखते हुए आकर्षक डिजाइन वाली राखियां भी उपलब्ध हैं। मिठाई की दुकानों पर भी विशेष तैयारियां की गई हैं। पूरे आदिवासी अंचल में रक्षाबंधन को लेकर उत्साह और भाई-बहन के स्नेह की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिल रही है।
रिपोर्ट ईश्वर टांक ( बाजना )