भोपाल। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक 2026 का कड़ा विरोध करते हुए इसे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया है। परिषद का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय निजी व्यावसायिक हितों को बढ़ावा देगा तथा शिक्षा के व्यापारीकरण का रास्ता खोलेगा।
अभाविप के अनुसार वर्तमान अधिनियम 2007 की धारा 7 में निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए न्यूनतम 25 एकड़ भूमि का स्पष्ट वैधानिक प्रावधान है लेकिन संशोधन के माध्यम से इसे पर्याप्त भूमि जैसे अस्पष्ट शब्दों से बदलने का प्रयास किया जा रहा है। परिषद का आरोप है कि ऐसा प्रावधान भविष्य में नियमों की मनमानी व्याख्या भ्रष्टाचार और पक्षपात की संभावनाओं को बढ़ाएगा तथा विश्वविद्यालयों की स्थापना के तय मानकों को कमजोर करेगा।
परिषद ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) भी पर्याप्त भूमि और आवश्यक आधारभूत अधोसंरचना को विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए अनिवार्य मानता है। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के प्रो. यशपाल बनाम छत्तीसगढ़ (2005) और आयशा जैन बनाम एमिटी यूनिवर्सिटी (2025) मामलों का हवाला देते हुए अभाविप ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल कागजी स्वीकृति का विषय नहीं बल्कि समुचित परिसर शैक्षणिक संसाधनों और मजबूत अधोसंरचना का केंद्र होना चाहिए।
अभाविप ने स्पष्ट किया कि वह शिक्षा को व्यापार नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण सामाजिक उत्तरदायित्व और सेवा का माध्यम मानती है। परिषद का कहना है कि उच्च शिक्षा का विस्तार आवश्यक है लेकिन यह गुणवत्ता पारदर्शिता और निर्धारित मानकों से समझौता करके नहीं किया जा सकता। केवल निजी विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है बल्कि उनमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा शोध संस्कृति और बेहतर शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना अधिक महत्वपूर्ण है।
अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन उच्च शिक्षा के भविष्य से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त भूमि जैसे अस्पष्ट प्रावधान शिक्षा के व्यापारीकरण और निजी हितों को बढ़ावा दे सकते हैं। शिक्षा को बाजार की वस्तु नहीं बनाया जा सकता और किसी भी सुधार का केंद्र विद्यार्थियों का हित गुणवत्ता और पारदर्शिता होना चाहिए।
परिषद ने सरकार से मांग की है कि प्रस्तावित संशोधन विधेयक पर पुनर्विचार किया जाए और उच्च शिक्षा के मूल मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए। अभाविप ने चेतावनी दी कि यदि विद्यार्थियों के हितों की अनदेखी की गई तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेगा। यह प्रेस विज्ञप्ति प्रांत कार्यालय मंत्री सौरभ प्रजापति द्वारा जारी की गई।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत