रतलाम / सैलाना। नगर के हृदय स्थल वार्ड क्रमांक 13 में गणेश मंदिर के पीछे स्थित पुराना सब्जी मार्केट आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। जिस स्थान पर कभी सैलाना विधानसभा का सबसे बड़ा और सबसे व्यवस्थित सब्जी बाजार सजता था, जहां सुबह से शाम तक व्यापार की रौनक रहती थी, वहीं आज चारों ओर खंडहर गंदगी नशेड़ियों की आवाजाही और असामाजिक गतिविधियों का डेरा नजर आता है। लगभग 29 वर्षों से यह करोड़ों रुपये मूल्य की नगर परिषद की संपत्ति प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बनी हुई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 1997-98 में नगर परिषद द्वारा सब्जी मार्केट को बस स्टैंड क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया था। उस समय यह उम्मीद जताई गई थी कि व्यापारियों को नई जगह बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और पुराने बाजार का आधुनिक स्वरूप में पुनर्विकास किया जाएगा। लेकिन बाजार तो शिफ्ट हो गया मगर पुराने सब्जी मार्केट का विकास आज तक केवल फाइलों में ही कैद रहा।
सबसे हैरानी की बात यह है कि इस बहुमूल्य सरकारी जमीन को वर्षों तक यूं ही वीरान छोड़ दिया गया। रखरखाव के अभाव में पूरा परिसर खंडहर बन गया और धीरे-धीरे यह स्थान नशेड़ियों असामाजिक तत्वों और सैलाना विधानसभा का सबसे बड़ा मूत्रालय में तब्दील हो गया।
नगर के बीचों-बीच स्थित यह ऐतिहासिक स्थल आज बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है जो नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
वर्ष 2017 से 2022 के दौरान तत्कालीन नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती नम्रता जितेन्द्र सिंह राठौर ने इस मार्केट के पुनर्विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की थी। नगर परिषद इंदिरा गांधी बस स्टैंड मार्केट और पुराने सब्जी मार्केट के पुनर्निर्माण के लिए विस्तृत डीपीआर (DPR) तैयार करवाई गई जिस पर लगभग 4 से 5 लाख रुपये खर्च किए गए। लेकिन पहले चुनावी आचार संहिता और उसके बाद कोरोना महामारी के कारण यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
इसके बाद वर्तमान कार्यकाल में नगर परिषद अध्यक्ष चेतन्य शुक्ला नगर में कई विकास कार्य प्रारम्भ हुए लेकिन पुराना सब्जी मार्केट आज भी अपनी बदहाली से बाहर नहीं निकल सका।
इस बीच बाजार क्षेत्र की जमीनों के दाम आसमान छूने लगे हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार हाल ही में गणेश मंदिर के पास महज 56 वर्गफीट की एक दुकान लगभग 43 लाख रुपये में बिकी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नगर परिषद की यह जमीन आज करोड़ों रुपये की संपत्ति बन चुकी है। यदि यहां आधुनिक कॉम्प्लेक्स विकसित कर स्थानीय व्यापारियों को दुकानें उपलब्ध कराई जाएं तो नगर परिषद को भारी राजस्व मिलेगा और दर्जनों युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
चिंता की सबसे बड़ी वजह यह है कि यह पूरा इलाका नगर का सबसे व्यस्त क्षेत्र है। प्रतिदिन यहां से सैकड़ों स्कूली बच्चे महिलाएं बुजुर्ग व्यापारी और यात्री गुजरते हैं।
जर्जर भवन किसी भी समय बड़ा हादसा कर सकते हैं। हाल ही में बस स्टैंड स्थित जर्जर दुकानों का छज्जा गिरने की घटना ने यह साबित कर दिया कि खतरा अब केवल आशंका नहीं बल्कि हकीकत बन चुका है।
जबकी सोचने वाली बात यह है की पुरानी सब्जी मंडी की दुकाने बस स्टैंड की 15 दुकानों से पहले की बनी हुई है यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
अब नगरवासियों का सवाल सीधा है—क्या प्रशासन किसी मासूम की जान जाने का इंतजार कर रहा है? क्या करोड़ों रुपये मूल्य की नगर परिषद की इस ऐतिहासिक संपत्ति का पुनर्विकास केवल चुनावी वादों तक ही सीमित रहेगा? या फिर जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस ओर गंभीर पहल कर सैलाना को उसका ऐतिहासिक व्यापारिक गौरव वापस दिलाएंगे?
नगरवासियों की मांग है कि पुराने सब्जी मार्केट के पुनर्विकास की डीपीआर को तत्काल अमल में लाया जाए, जर्जर भवनों को सुरक्षित तरीके से हटाया जाए परिसर को असामाजिक गतिविधियों से मुक्त कराया जाए और आधुनिक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स का निर्माण कर सैलाना के विकास को नई दिशा दी जाए।
अब निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि वे इस ऐतिहासिक बाजार को नई पहचान देते हैं या फिर इसे यूं ही खंडहर बने रहने देगें ।
रिपोर्टर : जितेन्द्र कुमावत