रतलाम
रतलाम (मध्य प्रदेश) में करणी सेना परिवार का महू-नीमच फोरलेन पर चला जोरदार विरोध प्रदर्शन आखिरकार करीब 30 घंटे बाद समाप्त हो गया। बुधवार शाम को प्रदर्शनकारियों ने सड़क खाली कर दी। 11 सूत्रीय मांगों पर प्रशासन के आश्वासन और 14 साल की गुमशुदा बालिका के मिल जाने के बाद करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर ने धरना खत्म करने की घोषणा की।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति को खुलकर सामने ला दिया, जहां कलेक्टर से मुलाकात नहीं होने पर नाराजगी चरम पर पहुंच गई।
फोरलेन बना धरनास्थल, रातभर डटे रहे करणी सैनिक
मंगलवार दोपहर शुरू हुआ यह आंदोलन देखते ही देखते उग्र रूप ले बैठा। पुलिस ने करणी सेना को शहर में प्रवेश से पहले ही डोसी गांव फोरलेन पर रोक दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी वहीं सड़क पर बैठ गए।
हालात ऐसे बने कि:
फोरलेन पर टेंट लगाया गया
बीच सड़क पर खाना बनाया गया
कालीन-गद्दे बिछाकर रातभर वहीं सोए
पूरी रात पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने डटे रहे
इस दौरान महू-नीमच फोरलेन पर लंबा जाम लग गया, जिससे आम जनता भी खासा परेशान रही।
कलेक्टर से न मिलने पर भड़के शेरपुर
धरने के दौरान सबसे बड़ा विवाद कलेक्टर से मुलाकात न होने को लेकर हुआ। इस पर जीवन सिंह शेरपुर ने तीखा बयान देते हुए कहा—
हम अपनी संवैधानिक बात रखना चाहते थे, लेकिन कलेक्टर मैडम शायद ज्यादा व्यस्त थीं… क्या हम इस देश, प्रदेश और जिले के नागरिक नहीं हैं?
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने जानबूझकर मिलने से रोका, जिसके कारण उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा।
नाबालिग की तलाश बना बड़ा मुद्दा
धरने की सबसे अहम मांगों में से
एक 2 महीने से लापता 14 साल की बालिका की तलाश थी।
शेरपुर ने कहा:
परिजन थक चुके थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हमने धरना दिया और बालिका मिल गई… क्या हर बार ऐसा ही करना पड़ेगा?
बालिका के मिलने के बाद आंदोलन को खत्म करने का निर्णय लिया गया।
प्रशासन का पक्ष
मौके पर पहुंचीं अपर कलेक्टर डॉ. शालिनी श्रीवास्तव ने बताया कि:
प्रदर्शन 11 बिंदुओं को लेकर किया जा रहा था
प्रशासन ने पहले भी जानकारी दी थी, लेकिन प्रदर्शनकारी संतुष्ट नहीं थे
सभी मांगों पर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है
क्या हुआ था पूरा घटनाक्रम?
करणी सेना कलेक्ट्रेट घेराव करने जा रही थी
पुलिस ने शहर के सभी एंट्री पॉइंट पर भारी बैरिकेडिंग कर दी
प्रदर्शनकारियों को शहर में घुसने से रोका गया
कलेक्टर से मिलने की जिद पर अड़े रहे
कलेक्टर नहीं आईं, तो फोरलेन पर ही धरना शुरू
रात 1 बजे तक कलेक्टर मिशा सिंह और एसपी अमित कुमार सर्किट हाउस में मौजूद रहे, लेकिन आमना-सामना नहीं हुआ।
आखिरकार क्यों खत्म हुआ धरना?
करीब 30 घंटे तक चले इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे का अंत तब हुआ जब:
प्रशासन ने मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिया
गुमशुदा बालिका मिल गई
इसके बाद करणी सेना ने आंदोलन समाप्त कर दिया और फोरलेन खाली कर दी।
लोकतंत्र पर सवाल या प्रशासनिक दूरी?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही उठा—
क्या जनता की बात सुनने के लिए अब सड़क पर उतरना जरूरी हो गया है?
जीवन सिंह शेरपुर का बयान इस बहस को और हवा दे गया, जिसमें उन्होंने लोकतंत्र और प्रशासनिक रवैये पर सीधे सवाल खड़े किए।
कुल मिलाकर, रतलाम का यह आंदोलन सिर्फ धरना नहीं, बल्कि जनता बनाम प्रशासन के टकराव की बड़ी तस्वीर बनकर सामने आया, जिसने कई गंभीर सवाल छोड़ दिए हैं।
Crime reporter Jitendra Kumawat