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सीतामऊ : इस्लाम के पांच मूलभूत सिद्धांतों में से एक रोजा रखना भी है, जो हर बालिग महिला और पुरुष के लिए अनिवार्य माना गया है। इस वर्ष रमजान के मुकद्दस महीने की शुरुआत चांद दिखाई देने के बाद 19 फरवरी से हुई थी और उसी दिन पहला रोजा रखा गया था। अब रमजान अपने अंतिम पड़ाव में पहुंच चुका है और मुस्लिम समाज पूरी तरह इबादत में मशगूल नजर आ रहा है। नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में मुस्लिम समाज के बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं, कामकाजी लोग तथा व्यापारी भीषण गर्मी के बावजूद रोजा रखकर और पांच वक्त की नमाज पाबंदी के साथ अदा कर रहे हैं। मस्जिदों में तरावीह, कुरान की तिलावत और दुआओं का सिलसिला लगातार जारी है। तीन अशरों में बंटा है रमजान रमजान के पवित्र महीने को तीन अशरों यानी दस-दस दिनों के हिस्सों में बांटा गया है और प्रत्येक अशरे की अलग-अलग फजीलत बताई गई है। पहला अशरा रहमत का, दूसरा अशरा मगफिरत का और तीसरा तथा अंतिम अशरा जहन्नुम से आजादी का माना जाता है। वर्तमान में रमजान का आखिरी अशरा चल रहा है, जिसे सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान मुस्लिम समाज अधिक से अधिक इबादत, तिलावत और दुआ में समय व्यतीत कर रहा है। शब-ए-कद्र की पाक रात की तलाश रमजान के आखिरी अशरे की पांच विशेष रातें — 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं — बेहद पाक मानी जाती हैं। इन्हीं रातों में से किसी एक रात पवित्र कुरान शरीफ नाजिल हुआ था, जिसे शब-ए-कद्र कहा जाता है। इस रात की अहमियत अत्यंत अधिक बताई गई है। कुरान में इसे हजार महीनों से बेहतर रात बताया गया है, इसलिए मुस्लिम समाज इन रातों में विशेष इबादत, नमाज और दुआ करता है। मस्जिदों में एतेकाफ का सिलसिला रमजान के आखिरी अशरे में कई लोग एतेकाफ भी करते हैं। इसमें व्यक्ति दुनियावी कामों से अलग होकर मस्जिद में रहकर पूरी तरह इबादत में समय बिताता है। इस इबादत का अज्र बहुत अधिक बताया गया है। इस्लामी परंपरा के अनुसार हजरत मोहम्मद ने भी अपनी जिंदगी के अंतिम समय तक रमजान के आखिरी अशरे में एतेकाफ किया। शब-ए-कद्र को लेकर विशेष तैयारियां सीतामऊ नगर की कई मस्जिदों में शब-ए-कद्र के मद्देनजर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। मस्जिदों को आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया जा रहा है। इन पाक रातों में समाजजन पूरी रात जागकर नमाज, तिलावत और दुआ में मशगूल रहेंगे। बाजारों में बढ़ी रौनक रमजान के अंतिम दिनों के साथ ही ईद की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। नगर के बाजारों में रेडीमेड कपड़े, जूते-चप्पल, श्रृंगार सामग्री और किराना दुकानों पर महिलाओं, युवाओं और बच्चों की भीड़ दिखाई देने लगी है। अलविदा जुमा की नमाज अदा रमजान के अंतिम शुक्रवार को मस्जिदों में अलविदा जुमा की विशेष नमाज अदा की गई और देश में अमन, चैन और खुशहाली की दुआ मांगी गई। आगामी दिनों में चांद दिखाई देने के बाद ईद-उल-फितर का त्योहार हर्षोल्लास और भाईचारे के साथ मनाया जाएगा। रिपोर्ट : अंबालाल मकवाना |