रतलाम / सरवन (म.प्र.)। आदिवासी बहुल सरवन क्षेत्र में एक बार फिर सड़क हादसे ने एक परिवार को उजाड़ दिया है। ग्राम चावडाखेडी के सरपंच पति कोदर पिता मानजी के सगे भाई नानुराम (35) और भतीजे अल्पेश (14) की सोमवार शाम नीलगाय से टकराने वाली मोटरसाइकिल दुर्घटना में मौत हो गई। दोनों की मौत ने पूरे गांव में मातम छा दिया, लेकिन इससे भी बड़ा सवाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ खड़ा हुआ है—सरवन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर समय पर इलाज मिलता तो शायद जानें बच जातीं। अब पोस्टमार्टम के लिए भी रतलाम मेडिकल कॉलेज भागना पड़ रहा है, क्योंकि केंद्र में सफाईकर्मी तक नहीं हैं।
घटना का दर्दनाक ब्योरा
फरियादी कोदर (पिता मानजी, निवासी चावडाखेडी) ने थाना सरवन में बताया कि 3 नवंबर 2026 को शाम करीब 8 बजे उनके भाई नानुराम पिता मानजी (जाति भील मईडा, उम्र 35) और भतीजा अल्पेश पिता भंवर (उम्र 14) मोटरसाइकिल से खेत से घर लौट रहे थे। नानुराम गाड़ी चला रहे थे। सकरावदा-सरवन रोड पर लक्ष्मण निनामा के खेत के पास ग्राम चावडाखेडी पहुंचते ही सामने से अचानक नीलगाय आ गई। मोटरसाइकिल नीलगाय से टकरा गई। दोनों भाई-भतीजे मोटरसाइकिल सहित सड़क पर गिर पड़े।
नानुराम को सिर, दोनों हाथों और बदन पर अंदरूनी चोटें आईं। अल्पेश को दोनों हाथों और शरीर पर गंभीर चोटें लगीं। घायलों को सरवन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाया गया वहां पर उपलब्ध नहीं सेवा को देखते हुए फिर प्राइवेट वाहन से सैलाना अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने नानुराम की मौत की पुष्टि कर दी। अल्पेश को मेडिकल कॉलेज रतलाम ले जाया गया, जहां उनकी भी मौत हो गई। अल्पेश का शव मेडिकल कॉलेज रतलाम के पीएम रूम में रखा गया, जबकि नानुराम का शव पोस्टमार्टम के लिए रतलाम भेजा गया।
घटना को वालु पिता सवजी खराडी और आसपास के लोगों ने देखा। सरवन थाना जांचकर्ता/विवेचक जी.एल. भूरिया ने जांच शुरू की है। पोस्टमार्टम के बाद दोनों शव परिजनों को सौंप दिए गए।
अंतिम संस्कार में आसपास के गांवों से भारी संख्या में लोग पहुंचे। पूरे क्षेत्र में मातम छाया रहा।
स्वास्थ्य केंद्र की जर्जर हालत: जान बचाने का मौका भी नहीं
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य सेवाओं पर खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अगर सरवन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर घायलों को समय पर उचित उपचार मिल जाता तो शायद जानें बचाई जा सकती थीं। आदिवासी क्षेत्र में दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन पोस्टमार्टम के लिए भी रतलाम मेडिकल कॉलेज जाना पड़ रहा है।
कार्यालय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरवन द्वारा जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) रतलाम को 1 जुलाई 2025 को भेजे गए एक महत्वपूर्ण पत्र में साफ लिखा गया है कि केंद्र में सफाईकर्मी के पद (स्थाई और अस्थाई दोनों) खाली होने के कारण पोस्टमार्टम कराना मुश्किल हो रहा है। इसलिए अब पीएम केस मेडिकल कॉलेज रतलाम भेजे जा रहे हैं। पत्र की प्रति अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सैलाना, टीआई थाना सरवन और मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी सैलाना को भी भेजी गई थी।
रतलाम-बांसवाड़ा रोड पर रोज हादसे, स्वास्थ्य सेवाएं नाममात्र
रतलाम-बांसवाड़ा रोड पर पिछले कुछ दिनों से लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। लेकिन सरवन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर न तो पर्याप्त इलाज की सुविधा है, न सफाईकर्मी, न ही पोस्टमार्टम की व्यवस्था। आदिवासी क्षेत्रों में सड़क हादसों की संख्या बढ़ रही है, फिर भी स्वास्थ्य ढांचा चरमराया पड़ा है। स्थानीय लोगों का आक्रोश जायज है—जब बुनियादी सुविधाएं नहीं होंगी तो जानें कैसे बचेंगी?
प्रशासन को संज्ञान लेने की जरूरत
यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का जीता-जागता सबूत है। सरपंच परिवार की इस त्रासदी ने एक बार फिर उजागर किया है कि आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं कितनी कमजोर हैं। जिला प्रशासन, सीएमएचओ रतलाम, सैलाना अनुभाग और स्वास्थ्य विभाग को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। सफाईकर्मी पदों पर भर्ती, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को मजबूत बनाना, आपातकालीन इलाज की व्यवस्था और सड़क सुरक्षा के उपाय तुरंत लागू किए जाएं।
परिजनों के आंसू अभी सूखे नहीं हैं। गांव में मातम है। अब प्रशासन की बारी है कि वह सिर्फ कागजी कार्रवाई न करे, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव लाए ताकि भविष्य में कोई और परिवार इस तरह उजड़ने से बच सके।
सूचना स्रोत: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरवन का पत्र (1 जुलाई 2025) और स्थानीय जानकारी।
(यह रिपोर्ट क्षेत्र की गंभीर स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करने के लिए तैयार की गई है। प्रशासन से जांच और ठोस कार्रवाई की मांग की जाती है।)
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत