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अभियान जैन श्वेतांबर मालवा महासंघ एवं नवरत्न परिवार के संयुक्त तत्वावधान में 16 वें वर्ष में किया प्रवेश चीताखेड़ा । जैन श्वेतांबर मालवा महासंघ एवं नवरत्न परिवार के संयुक्त तत्वावधान में पर्युषण महापर्व के पूर्व देशभर में जिनालय शुद्धिकरण का विशेष अभियान 30 अगस्त को श्रद्धा और भक्ति के साथ आयोजित किया गया। इस अभियान के अंतर्गत भारत के विभिन्न राज्यों में लगभग 2 हजार से भी अधिक जैन जिनालयों के साथ- साथ चीताखेड़ा नगर के श्री चंद्रप्रभ स्वामी और श्री मुनि सुव्रत स्वामी जिनालय का भी जैन समुदाय द्वारा शुद्धिकरण एवं स्वच्छता कार्य किया गया। उल्लेखनीय है कि जिनालय शुद्धिकरण का यह पावन अभियान आचार्य भगवंत नवरत्न सागर सूरिश्वरजी महाराज साहब की प्रेरणा से और युवा हृदयसम्राट आचार्य विश्वरत्न सागर सुरीश्वरजी म. सा. के मार्गदर्शन में वर्ष 2011 में प्रारंभ हुआ था। निरंतर ब्रद्धा, सेवा और समर्पण के साथ आगे बढ़ते हुए यह अभियान अब अपने 16वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है और आज एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान का स्वरूप ले चुका है। अनेक राज्यों में श्रद्धा एवं उमंग के साथ आयोजन अभियान के तहत गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड , हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल, उड़िसा, झारखंड,बिहार सहित देश के अनेक राज्यों में जिनालय शुद्धिकरण का कार्य बद्धा और उत्साह के साथ किया जाता है। इसमें जिन जिनालयों की विशेष साफ-सफाई के साथ-साथ जिनालय की साज-सज्जा एवं आवश्यक व्यवस्थाओं को भी व्यवस्थित किया जाता है। औषधीय विधि से प्रतिमाओं का विलेपन इस अभियान की विशेषता यह है कि जिनालय की स्वच्छता के साथ धातु एवं पाषाण की जिन प्रतिमाओं का औषधीय द्रव्यों से विलेपन भी किया जाता है। इस पवित्र कार्य के लिए आवश्यक सामग्री की विशेष किट तैयार कर विभिन्न जिन जिनालयों तक पहुंचाई जाती है। नवरत परिवार के कार्यकर्ता गांव-गांव एवं विभित्र क्षेत्रों में जाकर इन किटों का वितरण भी करते हैं, ताकि अधिक से अधिक जिनालय इस अभियान से जुड़ सकें। पर्युषण महापर्व की आराधना का शुभ संकल्य नवरत्न परिवार जिनालयों की पवित्रता, स्वच्छता एवं धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए ऐसे पुनीत कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। पर्युषण महापर्व जैन समाज का प्रमुख आध्यात्मिक पर्व है। इसके पूर्व जिनालय शुद्धि करण अभियान के माध्यम से वातावरण को स्वच्छ एवं आध्यात्मिक बनाने के साथ श्रद्धालुओं में आराधना, भक्ति, तप, उपवास और धार्मिक चेतना का भाव जागृत किया जाता है। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |