रतलाम। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत डोसीगांव में आवंटित 208 फ्लैटों से हितग्राहियों को बेदखल किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। पूर्व विधायक एवं पूर्व महापौर रतलाम पारस सकलेचा दादा ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जांच की मांग की है। सकलेचा ने अपने पत्र में नगर निगम रतलाम की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि हितग्राहियों का आवंटन विधिवत निरस्त ही नहीं किया गया था तो उन्हें किस अधिकार के तहत फ्लैटों से बाहर निकाला गया और मकानों पर ताले लगाए गए।
सकलेचा के अनुसार वर्ष 2020-21 के दौरान शिवनगर प्रकाशनगर एवं जावरा रोड क्षेत्र में करीब 50 से 60 वर्षों से निवासरत गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले झुग्गीवासियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत डोसीगांव में फ्लैट देने का आश्वासन देकर विस्थापित किया गया था। हितग्राहियों को बताया गया था कि उन्हें बैंक में 20 हजार रुपए मार्जिन मनी जमा करनी होगी जबकि शेष 1 लाख 80 हजार रुपए का आवास ऋण पंजाब नेशनल बैंक के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।
पत्र के मुताबिक सभी 208 हितग्राहियों ने निर्धारित मार्जिन मनी जमा की। इसके बाद उन्हें आवंटन पत्र दिए गए और फ्लैटों का कब्जा भी सौंपा गया। कई परिवार वहां अपने परिवार के साथ रहने लगे। आवंटन पत्र की शर्तों में बैंक के माध्यम से 15 वर्षों की 180 मासिक किस्तों में आवास ऋण उपलब्ध कराने का उल्लेख होने की बात भी पूर्व विधायक ने कही है।
ऋण नहीं मिला तो बैंक और नगर निगम के चक्कर लगाते रहे हितग्राही
सकलेचा ने आरोप लगाया कि नगर निगम द्वारा किए गए आश्वासन के बावजूद सभी हितग्राहियों को अपेक्षित बैंक ऋण उपलब्ध नहीं हो सका। हितग्राही लगातार नगर निगम और पंजाब नेशनल बैंक के चक्कर लगाते रहे। बैंक द्वारा नगर निगम से संपर्क करने की बात कही गई जबकि हितग्राहियों के अनुसार नगर निगम की ओर से भी ऋण की व्यवस्था कराने के लिए प्रभावी प्रयास नहीं किए गए।
इसके बाद 5 अगस्त 2026 को भारी पुलिस बल कार्यपालिक दंडाधिकारी एवं तहसीलदार की मौजूदगी में फ्लैटों में कार्रवाई किए जाने का आरोप है। सकलेचा के पत्र के अनुसार इस दौरान परिवारों का घरेलू सामान बाहर निकाला गया। महिलाओं एवं बच्चों को बाहर किया गया तथा फ्लैटों पर नगर निगम द्वारा ताले लगा दिए गए।
आवंटन निरस्त नहीं हुआ तो बेदखली किस आधार पर
पूर्व विधायक ने सबसे बड़ा सवाल यही उठाया है कि यदि 208 हितग्राहियों का आवंटन निरस्त नहीं किया गया था तो उन्हें अतिक्रमणकारी मानकर बेदखल करने की कार्रवाई किस कानूनी आधार पर की गई। उन्होंने यह भी कहा कि हितग्राहियों द्वारा जमा की गई 20 हजार रुपए की मार्जिन मनी भी बैंक एवं नगर निगम के पास जमा है।
सकलेचा ने बताया कि हितग्राहियों ने कलेक्टर नगर निगम आयुक्त एवं एसडीएम राजस्व को आवेदन देकर बैंक ऋण उपलब्ध कराने की मांग की थी। उनका कहना था कि ऋण मिलने पर वे शेष राशि तथा बैंक की सभी किस्तें और ब्याज नियमानुसार जमा करने के लिए तैयार हैं। पत्र में आरोप लगाया गया है कि 4 अगस्त को नगर निगम आयुक्त द्वारा आवेदन स्वीकार नहीं किए जाने के कारण हितग्राहियों को आवेदन डाक से भेजना पड़ा।
396 हितग्राहियों और 166 NPA खातों का भी उठाया मुद्दा
6 अगस्त को नगर निगम आयुक्त एवं महापौर द्वारा मीडिया में दिए गए कथित बयान का हवाला देते हुए सकलेचा ने कहा कि अभी आवंटन निरस्त नहीं किया गया है और बकाया राशि जमा करने पर हितग्राही फ्लैट पुनः प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही 396 ईडब्ल्यूएस हितग्राहियों में से 166 हितग्राहियों के बैंक ऋण खाते एनपीए होने के कारण अन्य हितग्राहियों के ऋण स्वीकृत नहीं हो पाने की बात सामने आई है।
इसी बिंदु पर सकलेचा ने सवाल उठाया कि जिन 208 हितग्राहियों को ऋण मिला ही नहीं उन पर अन्य ऋण खातों के एनपीए होने का दुष्परिणाम किस आधार पर डाला गया। उन्होंने नगर निगम से यह भी पूछा कि जब हितग्राहियों को लिखित रूप से ऋण उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था तब बैंक अथवा अन्य वित्तीय संस्थाओं के समक्ष नगर निगम ने क्या प्रभावी प्रयास किए।
अंतिम सूचना पत्र में अवैध कब्जाधारी बताए जाने पर भी सवाल
पत्र में अंतिम सूचना पत्र में हितग्राहियों को कथित रूप से बिना अनुमति अवैध कब्जाधारी बताए जाने पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है। सकलेचा का कहना है कि जब फ्लैटों का आवंटन नगर निगम ने स्वयं किया। आवंटन पत्र जारी किए और कब्जा भी सौंपा तो बाद में उन्हीं हितग्राहियों को अवैध कब्जाधारी बताना गंभीर सवाल खड़े करता है।
सकलेचा ने पूरे मामले को प्रशासनिक निष्पक्षता प्राकृतिक न्याय एवं विधिक प्रक्रिया से जोड़ते हुए मुख्य सचिव से स्वतंत्र एवं वरिष्ठ अधिकारी से जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने। 208 परिवारों के फ्लैट निरस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाने तथा हितग्राहियों को तत्काल उनके फ्लैटों में पुनः प्रवेश दिलाने की मांग की है।
उन्होंने आवंटन पत्र में किए गए आश्वासन के अनुरूप पात्र हितग्राहियों के लिए बैंक ऋण उपलब्ध कराने की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया है।
सकलेचा द्वारा यह पत्र 7 अगस्त 2026 को मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को भेजा गया है। पत्र की प्रतिलिपि कलेक्टर रतलाम एवं नगर निगम आयुक्त को भी भेजी गई है। स्पीड पोस्ट की रसीद के अनुसार पत्र Ratlam RMS L2S Counter से 7 अगस्त को शाम 5:43 बजे बुक किया गया।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत