रतलाम। नगर निगम रतलाम की कार्रवाई को लेकर शहर में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता पारस सकलेचा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम ने डोसी गांव स्थित बहुमंजिला आवास योजना में रह रहे 208 दलित एवं गरीब परिवारों को गैरकानूनी और अमानवीय तरीके से फ्लैटों से बाहर निकालकर उनके आवासों पर ताले लगा दिए। आरोप है कि बिना पर्याप्त सूचना दिए परिवारों का घरेलू सामान बाहर फेंक दिया गया, जिससे बरसात के मौसम में सैकड़ों लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार नगर निगम एवं प्रशासन ने वर्षों पहले शिवनगर, प्रकाश नगर और जावरा रोड की झोपड़पट्टियों में 50 से 60 वर्षों से निवासरत गरीब परिवारों को यह आश्वासन देकर हटाया था कि उन्हें डोसी गांव की बहुमंजिला योजना में मात्र 20 हजार रुपये मार्जिन मनी जमा करने पर फ्लैट उपलब्ध कराए जाएंगे तथा 1.80 लाख रुपये का बैंक ऋण दिलाया जाएगा। बताया गया कि योजना के तहत 396 परिवारों को फ्लैट आवंटित किए गए, जिनमें से 166 परिवारों को ही बैंक ऋण मिल सका, जबकि शेष परिवारों को बार-बार मांग करने के बावजूद ऋण उपलब्ध नहीं कराया गया।
विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि नगर निगम द्वारा जारी आवंटन पत्र की शर्तों में 15 वर्षों की 180 मासिक किस्तों में आवासीय ऋण उपलब्ध कराने का स्पष्ट उल्लेख था। इसके बावजूद अंतिम नोटिस में इन्हीं परिवारों को अतिक्रमणकारी बताया गया, जबकि उन्हें विधिवत फ्लैट आवंटित कर कब्जा दिया जा चुका था।
आरोप है कि 4 अगस्त 2026 को फ्लैटधारी बैंक ऋण दिलाने की मांग का आवेदन लेकर नगर निगम पहुंचे, लेकिन आयुक्त ने आवेदन लेने से इनकार कर दिया। बाद में आवेदन डाक के माध्यम से भेजा गया। इसी बीच नगर निगम ने कार्रवाई करते हुए फ्लैटों को खाली कराकर ताले लगा दिए। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उनके खाद्यान्न, नगद राशि, जेवर सहित अन्य घरेलू सामान ट्रॉलियों में भरकर ले जाया गया।
पारस सकलेचा ने इस कार्रवाई को गरीब, दलित और वंचित वर्ग के साथ अन्याय बताते हुए इसे अमानवीय, निंदनीय और शर्मनाक करार दिया है। उन्होंने नगर निगम से मांग की है कि सभी प्रभावित 208 परिवारों को तत्काल पुनः उनके फ्लैटों में रहने की अनुमति दी जाए तथा बैंक ऋण की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें न्याय दिलाया जाए।
हालांकि, इस पूरे मामले में नगर निगम प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना शेष है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत