आंधी ने उजाड़ा निराश्रित महिला का घर....
मंदसौर। जिले में सोमवार रात्रि को आए भीषण चक्रवाती तूफान और तेज बारिश ने जहां एक तरफ भारी तबाही मचाई, वहीं दूसरी तरफ सरकार और प्रशासन के गरीब को पक्के मकान के दावों की पोल खोलकर रख दी है। लगभग 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली भीषण आंधी और तेज बारिश ने पूरे क्षेत्र में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया।
प्राकृतिक आपदा के बीच जिले से एक ऐसी विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने न मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है बल्कि सरकार के दावों की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। यह दास्तां मंदसौर जिले के ग्राम करजू की रहने वाली एक निराश्रित बुजुर्ग महिला, रुक्मण बाई बेवा कारूलाल पाटीदार की है।
निराश्रित महिला रुक्मण बाई आकोदड़ा कालिका माता मंदिर परिसर में एक छोटी सी दुकान चलाकर किसी तरह अपनी आजीविका चलाती हैं। रहने के लिए उनके पास कोई पक्का मकान नहीं है वह एक अस्थायी पाल-पल्ली (तिरपाल) के सहारे बनाए गए आशियाने में जीवन गुजार रही थीं।
सोमवार शाम को आई आंधी और बारिश ने उनके इस गरीब आशियाने को भी उजाड़ दिया। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में बेबस बुजुर्ग महिला महज एक प्लास्टिक की पन्नी के सहारे खुद को आंधी, पानी और ठंड से बचाती नजर आई। यह तस्वीर झकझोर देने वाली है।
सरकार गरीब को पक्का मकान देने का दावा कर रही है, तब एक बेसहारा बुजुर्ग महिला को तूफान के बीच प्लास्टिक की पन्नी में छिपकर रात काटने पर क्यों मजबूर होना पड़ रहा है.?
यह घटना मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक दावों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है.?