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चीताखेड़ा । हरियाली अमावस्या पर्व बुधवार को पूरे अंचल में श्रद्धा, उमंग, उल्लास और भक्ति के साथ मनाया गया। हरियाली अमावस्या पर्व का मुख्य व्यंजन मालपुओं की जमकर हुई खरीदारी, मालपुआ बाजार में 200 रुपए से लेकर 400 रुपए तक प्रति किलो के भाव खूब बिके। एक ओर जहां शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी, शिवालयों में भगवान भोलेनाथ का विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान के दर्शन हेतु दूर सुदूर से लोग आए और सभी ने बारी-बारी से दिव्य दर्शन लाभ लिए। हरियाली अमावस्या पर्व की पारंपरिक मिठाई मालपुआ बनाएं गये है बाजार में अधिकांश दुकानों पर दिनभर मालपुए की खुशबू महकती रही। श्रावण मास को हरियाली अमावस्या के इस दिन हर घर में व्यंजन मालपुए बनाए जाते हैं और भगवान को इसका भोग लगाया जाता है। देशी घी और रबड़ी के मालपुए व्यंजन की खासी डिमांड रही है। हरियाली अमावस्या वर्षा ऋतु के बीच आने वाला ऐसा पर्व है जो प्रकृति और अध्यात्म दोनों को समर्पित होता है। इसी कारण इसे प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का दिन भी माना जाता है। इस अवसर पर जहां शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी, शिवालयों में भगवान भोलेनाथ का विशेष श्रंगार कर पूजन -अर्चन की गई, वहीं दूसरी ओर इस खास दिन को प्राकृतिक सौंदर्य के साथ मनाने के लिए पिकनिक स्पॉट, बाग - बगीचों और हरियाली से आच्छादित स्थलों पर लोगों का हुजूम उमड़ा। अंचल के प्रमुख शिवालयों में कराड़िया महाराज के अतिप्राचीन भूतेश्वर महादेव,रामझर महादेव, महाकाल,निलकंठ महादेव, गंगेश्वर महादेव, कछुआ महादेव सहित कई शिवालयों में भगवान शिव का विशेष श्रृंगार किया गया। हरियाली अमावस्या पर्व ने आस्था , संस्कृति और पारिवारिक स्नेह का अनुपम संगम प्रस्तुत किया। श्रावण माह की हरियाली अमावस्या के दिन हर घर में विशेष कर मालपुए (व्यंजन) पकवान बनाए जाते हैं और भगवान को मालपुआ का भोग लगाया जाता है ऐसा माना जाता है कि साल में एक बार बनने वाली इस मिठाई मालपुआ का भोग अगर भगवान को लगाया जाए तो भरपूर धन्य धान की प्राप्ति होती है। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |