|
|
नीमच : सरकारी योजनाओं का लाभ सही समय पर मिले और किसान नई तकनीक अपनाए, तो खेती लाभ का सौदा बन सकती है। इसका उत्कृष्ट उदाहरण नीमच विकासखंड के ग्राम केलूखेड़ा के प्रगतिशील किसान दशरथ नरसिंहलाल पाटीदार हैं। परंपरागत गेहूं की खेती से सीमित आय प्राप्त करने वाले दशरथ ने एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत संरक्षित खेती अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है। आज वे क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। गेहूं की खेती से सीमित आय दशरथ पाटीदार पहले 2500 वर्गमीटर क्षेत्र में गेहूं की खेती करते थे। सिंचाई, खाद और बीज पर लगभग 45 हजार रुपये खर्च करने के बाद उन्हें 55 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता था, जिससे कुल आय 1,47,125 रुपये होती थी। सभी खर्चों के बाद उनका शुद्ध लाभ मात्र 1,02,125 रुपये रह जाता था। इससे परिवार का भरण-पोषण और खेती का विस्तार करना कठिन था। MIDH योजना से मिली नई दिशा उद्यानिकी विभाग के माध्यम से उन्हें MIDH योजना की जानकारी मिली। योजना के तहत उन्हें 8.87 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने अपने खेत में 2500 वर्गमीटर का शेडनेट हाउस स्थापित किया। विभागीय अधिकारियों ने उन्हें संरक्षित खेती, ड्रिप सिंचाई, उन्नत बीजों के उपयोग और वैज्ञानिक कीट प्रबंधन का प्रशिक्षण भी प्रदान किया। खीरा-ककड़ी की खेती से बढ़ी आमदनी शेडनेट हाउस में नियंत्रित वातावरण मिलने से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। एक सीजन में उन्होंने 450 क्विंटल खीरा-ककड़ी का उत्पादन प्राप्त किया। लगभग 2 लाख रुपये की लागत के बाद उन्हें 6.75 लाख रुपये की कुल आय हुई और 4.75 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिला। यह लाभ गेहूं की खेती से होने वाली आय की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक है। किसान की जुबानी दशरथ पाटीदार बताते हैं कि MIDH योजना उनके लिए वरदान साबित हुई है। पहले मौसम की मार और बाजार भाव में उतार-चढ़ाव के कारण नुकसान उठाना पड़ता था, लेकिन अब शेडनेट हाउस में बेहतर गुणवत्ता की फसल तैयार होती है, जिससे अच्छे दाम मिलते हैं। उन्होंने योजना के लिए जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। अन्य किसानों के लिए प्रेरणा वरिष्ठ उद्यानिकी विकास अधिकारी विजेश वसुनिया के अनुसार संरक्षित खेती कम पानी और कम भूमि में अधिक उत्पादन का प्रभावी माध्यम है। यह योजना विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही है। दशरथ पाटीदार की सफलता से प्रेरित होकर केलूखेड़ा एवं आसपास के क्षेत्रों के कई किसान अब संरक्षित खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। एकीकृत बागवानी विकास मिशन वास्तव में “लागत कम, आमदनी ज्यादा” के लक्ष्य को साकार करते हुए किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। |