रतलाम
रतलाम शहर में आवासीय भूखंडों पर संचालित निजी अस्पतालों और नर्सिंग होमों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वार्ड क्रमांक-42 के पार्षद हितेश कामरेड द्वारा नगर निगम आयुक्त को दिए गए विस्तृत आवेदन के बाद निजी स्वास्थ्य संस्थानों में हलचल तेज हो गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नगर सुधार न्यास की विभिन्न योजनाओं में आवासीय उपयोग के लिए आवंटित भूखंडों का वर्षों से व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है और इस दौरान नियमों के विपरीत नामांतरण तथा लीज संबंधी प्रक्रियाएं भी की गई हैं।
शिकायत में विशेष रूप से शाह नर्सिंग होम, रतलाम हॉस्पिटल, माहेश्वरी हॉस्पिटल, मेहरा नर्सिंग होम सहित अन्य निजी नर्सिंग होमों का उल्लेख करते हुए जांच की मांग की गई है। आरोप है कि इनमें से कई संस्थान 15 वर्षों से अधिक समय से आवासीय भूखंडों और फ्लैटों में संचालित हो रहे हैं तथा लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।
पार्षद हितेश कामरेड का कहना है कि नगर सुधार न्यास की योजना क्रमांक-20 शास्त्रीनगर और योजना क्रमांक-44 काटजू नगर सहित विभिन्न क्षेत्रों में मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए रियायती दरों पर आवासीय भूखंड आवंटित किए गए थे, लेकिन वर्तमान में इनका उपयोग अस्पतालों और नर्सिंग होमों के रूप में किया जा रहा है। इससे न केवल मूल आवंटन की शर्तों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि नगर निगम को राजस्व की क्षति होने की भी आशंका है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि नगर निगम की विकास शाखा के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से नियमों के विपरीत नामांतरण और लीज अवधि वृद्धि की गई। साथ ही सवाल उठाया गया है कि भवन उपयोग परिवर्तन, फायर सेफ्टी, पार्किंग, अस्पताल संचालन और अन्य वैधानिक स्वीकृतियां किस आधार पर प्रदान की गईं अथवा उनका पालन किया गया या नहीं।
पार्षद ने मांग की है कि जिन भूखंडों का आवंटन आवासीय प्रयोजन के लिए हुआ था, उन्हें उनके मूल स्वरूप में वापस लाया जाए, नियम विरुद्ध नामांतरण निरस्त किए जाएं तथा पट्टे की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर आवंटन निरस्त कर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
शिकायत सामने आने के बाद शहर के निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अब निगाहें नगर निगम प्रशासन, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों की जांच पर टिकी हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला केवल कुछ संस्थानों तक सीमित नहीं रहकर शहर में आवासीय भूखंडों पर संचालित अन्य निजी नर्सिंग होमों और अस्पतालों की वैधानिक स्थिति की भी व्यापक जांच का कारण बन सकता है।
रिपोर्टर : जितेन्द्र कुमावत