चीताखेड़ा । विगत दिनों 20 मई बुधवार को रीवा में विहार के दौरान दो जैन साध्वियों की सड़क हादसे में हुई मौत के बाद देशभर में जैन समाज में भारी आक्रोश है । जानबूझकर की गई हत्या के विरोध में जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन श्री संघ द्वारा गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम चीताखेड़ा चौकी प्रभारी राजेंद्र सिंह सिसौदिया को ज्ञापन सौपा गया ।
जैन समाज ने ज्ञापन के माध्यम से जैन साधु साध्वियों के विहार मार्गों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने, संवेदनशील एवं व्यस्त मार्गों पर पुलिस गश्त एवं निगरानी बढाने, तेज रफ्तार एवं लापरवाह वाहन चालकों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करने, संतजनों के विहार के समय प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक सुरक्षा प्रबंध उपलब्ध कराए जाने, जैन साधु-साध्वियों की सुरक्षा हेतु स्थायी एवं प्रभावी नीति बनाने आदि विभिन्न मांग रखी। ज्ञापन का वाचन करते हुए शांतिलाल झातरिया ने बताया कि जैन साध्वी आर्यिका श्रुतमति माताजी एवं आर्यिका उपशम मति माताजी जिनकी विहार के दौरान जानबूझकर हत्या की गई। जैन समाज की परम् पूज्या दोनों आर्यिका माताओं के असामयिक काल धर्म प्राप्त होने की घटना ने संपूर्ण जैन समाज एवं संत समाज की अत्यंत व्यथित एवं आहत किया है। इस दुखद घटना के विरोध में चीताखेड़ा जैन समाज ने जैन संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर जैन समाज ने गुरुवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव मध्यप्रदेश शासन के नाम चौकी प्रभारी को ज्ञापन सौंपा गया। जैन साधु-साध्वीजन त्याग, तपस्या, संयम एवं अहिंसा के मार्ग पर चलकर समाज को नैतिक एवं आध्यात्मिक दिशा प्रदान करते हैं। वे पैदल विहार करते हुए धर्म प्रचार एवं जनकल्याण का कार्य करते हैं, अतः उनके विहार के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन-प्रशासन की नैतिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी है। पूर्व में भी अनेक बार जैन साधु-साध्वियों के साथ इस प्रकार की दुखद घटनाएं घटित हो चुकी हैं,जिससे जैन समाज को अपूरणीय क्षति हुई है। यह अत्यंत चिंतनीय विषय है कि संतजनों की सुरक्षा को लेकर अभी तक पर्याप्त एवं प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हो सकी है। अतः सकल जैन समाज की ओर से यह मांग है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु तत्काल ठोस एवं प्रभावी कदम उठाए जाएं। इस अवसर पर जैन समाज अध्यक्ष अशोक (चपलोत) जैन, श्री चंद्रप्रभ जिनालय ट्रस्ट अध्यक्ष सुनील कुमार सगरावत, अशोक झातरिया, नरेश चौरड़िया, शांतिलाल (झातरिया) जैन, राजू खिमेसरा, महेश चौरड़िया, शांतिलाल खिमेसरा, कारुलाल बोहरा, गजेन्द्र बोहरा आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
रिपोर्ट : दशरथ जी माली