जिला संवाददाता मुकेश बीजापारी कि रिपोर्ट 7697389976
स्व. शिव सिंह आर्य की द्वितीय पुण्यतिथि पर तीन दिवसीय आयोजन, आचार्य डॉ. आयुष आर्य ने माता-पिता की सेवा को बताया सबसे बड़ा धर्म कानड़। आर्य समाज के पूर्व प्रचारक एवं समाजसेवी स्व. शिव सिंह आर्य की द्वितीय पुण्यतिथि के अवसर पर आर्य निवास में आयोजित तीन दिवसीय सामवेद पारायण महायज्ञ का रविवार को पूर्णाहुति के साथ समापन हुआ। नर्मदापुरम स्थित आर्ष गुरुकुल से आए आचार्य डॉ. आयुष आर्य एवं ब्रह्मचारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ संपन्न कराया। आयोजन में कानड़ सहित आगर, मोहन बड़ोदिया, करजू, सुसनेर, बड़ौद आदि क्षेत्रों से आर्य समाज के लोग शामिल हुए।
महायज्ञ के तीनों दिन सुबह और शाम गाय के घी एवं हवन सामग्री से वैदिक मंत्रों के साथ आहुतियां दी गईं। यज्ञ में कुल 1875 मंत्रों के माध्यम से आहुतियां समर्पित की गईं। वैदिक परंपरा के अनुरूप आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
भजन संध्या में देर रात तक बही भक्ति की सरिता
आयोजन के तहत शनिवार रात भजन संध्या का आयोजन किया गया। इसमें हरिओम सरल, काशीराम आर्य, दिलीप आर्य, सत्यनारायण मालवीय, दिनेश बैरागी सहित अन्य भजन गायकों ने सुंदर भजनों की प्रस्तुतियां दीं। भजनों के माध्यम से वैदिक विचारों और ईश्वर भक्ति का संदेश दिया गया। भजन संध्या देर रात तक चलती रही, जिसमें उपस्थित लोगों ने भक्ति संगीत का आनंद लिया।
माता-पिता की सेवा ही सच्चे धर्म का आधार
समापन अवसर पर आर्ष गुरुकुल नर्मदापुरम से आए आचार्य डॉ. आयुष आर्य ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज का मनुष्य धन-दौलत और भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में इतना उलझ गया है कि अपने घर में मौजूद माता-पिता के महत्व को भी भूलता जा रहा है। जबकि माता-पिता परिवार के सबसे बड़े आधार हैं और उनकी सेवा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
उन्होंने कहा कि लोग सुख-शांति की कामना लेकर मंदिरों में जाते हैं और देवी-देवताओं की आराधना करते हैं, लेकिन अपने घर में माता-पिता की सेवा और सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है। परिवार में माता-पिता का आशीर्वाद, आपसी प्रेम और सम्मान हो तो घर में सुख-शांति का वातावरण बनता है। उन्होंने लोगों से वैदिक संस्कृति के मूल्यों को अपनाने, माता-पिता का सम्मान करने और अपने जीवन में सदाचार को स्थान देने का आह्वान किया।
तीन दिवसीय आयोजन का समापन वैदिक मंत्रोच्चार, पूर्णाहुति और विश्व कल्याण की कामना के साथ हुआ।