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विशेष आलेख राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण से लेकर करोड़ों की शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने तक, जल संरक्षण से लेकर जरूरतमंदों की मदद तक—प्रशासनिक दक्षता के साथ मानवीय संवेदनाओं की मिसाल पेश करता नीमच जिला प्रशासन। प्रशासनिक पद पर बैठना एक जिम्मेदारी है, लेकिन उस पद को जनसेवा का माध्यम बनाना अपने आप में एक अलग पहचान है। जब प्रशासनिक निर्णयों में दृढ़ता, कार्यशैली में पारदर्शिता, नेतृत्व में दूरदर्शिता और व्यवहार में मानवीय संवेदनाएं जुड़ जाती हैं, तब सुशासन केवल सरकारी शब्दावली तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आमजन के जीवन में बदलाव के रूप में दिखाई देने लगता है। नीमच जिले में कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा के कार्यकाल को इन्हीं आयामों के संदर्भ में देखा जा सकता है। अगस्त 2024 में नीमच जिले की कमान संभालने वाले 2015 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री चंद्रा ने राजस्व प्रशासन, जल संरक्षण, शासकीय संपत्तियों की सुरक्षा, निर्वाचन प्रबंधन, सैनिक कल्याण और जरूरतमंदों की सहायता जैसे क्षेत्रों में विभिन्न पहल की हैं। उनके कार्यकाल में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने के साथ-साथ जनसमस्याओं के समाधान और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिखाई देता है। यह कहानी केवल सरकारी उपलब्धियों और आंकड़ों की नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक सोच की भी है, जिसमें नियमों का पालन और मानवीय संवेदनाएं एक-दूसरे के पूरक बनते हैं। राजस्व प्रशासन में उल्लेखनीय प्रदर्शन, समयबद्ध निराकरण पर जोर राजस्व संबंधी मामले ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आम नागरिकों के जीवन से सीधे जुड़े होते हैं। नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और नक्शा तरमीम जैसे प्रकरणों में अनावश्यक देरी आमजन के लिए परेशानी का कारण बनती है। इसे ध्यान में रखते हुए कलेक्टर श्री चंद्रा ने राजस्व प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण और लंबित मामलों में कमी लाने को प्राथमिकता दी। जिला प्रशासन के अनुसार, आरसीएमएस पोर्टल पर राजस्व प्रकरणों के निराकरण में नीमच जिले ने प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे प्रकरणों के निराकरण में 95 प्रतिशत तक उपलब्धि हासिल करने तथा नक्शा तरमीम के कार्य को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। राजस्व महा-अभियान और फार्मर रजिस्ट्री के अंतर्गत रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (आरओआर) लिंकिंग में भी शत-प्रतिशत सैचुरेशन की दिशा में काम किया गया। स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में भी जिले ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की। मनासा तहसील के ग्राम बालागंज में संभाग की पहली प्रॉपर्टी रजिस्ट्री पूर्ण कराई गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले में योजना के तहत 1,03,827 प्लॉट और 1,25,607 हितग्राही पंजीकृत हैं। ये प्रयास इस बात को रेखांकित करते हैं कि राजस्व प्रशासन की सफलता केवल फाइलों के निपटारे में नहीं, बल्कि नागरिकों को समय पर अधिकार और राहत उपलब्ध कराने में निहित है। जल संरक्षण में नवाचार, अनुपयोगी बोरवेल को बनाया उपयोगी जल संकट के दौर में जल संरक्षण केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। नीमच जिला प्रशासन ने जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत अनुपयोगी बोरवेल को रिचार्ज पिट में परिवर्तित करने की पहल के माध्यम से कम लागत वाले जल संरक्षण मॉडल को आगे बढ़ाया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जावद क्षेत्र की सरोदा ग्राम पंचायत में इस प्रकार की पहली संरचना तैयार की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसकी लागत लगभग 20 से 30 हजार रुपये रही। कम खर्च में वर्षा जल को जमीन में पहुंचाने और भूजल पुनर्भरण की संभावनाओं को मजबूत करने वाली यह पहल स्थानीय स्तर पर उपयोगी नवाचार के रूप में सामने आई। इसके साथ ही जिले में लगभग 400 तालाबों के गहरीकरण का कार्य किसानों को रॉयल्टी मुक्त उपजाऊ मिट्टी उपलब्ध कराकर किया जा रहा है। इससे जल संरचनाओं की क्षमता बढ़ाने के साथ किसानों को भी लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया है। यह पहल बताती है कि यदि स्थानीय संसाधनों, जनभागीदारी और प्रशासनिक इच्छाशक्ति का समन्वय हो, तो सीमित लागत में भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक काम किया जा सकता है। शासकीय भूमि की सुरक्षा: अतिक्रमण के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई शासकीय भूमि जनता की संपत्ति है। उस पर अवैध कब्जा केवल सरकारी जमीन का नुकसान नहीं, बल्कि सार्वजनिक हित और भविष्य की विकास योजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधनों को सीमित करने का भी विषय है। इसी दृष्टि से जिले में शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया गया। सगराना में लगभग तीन बीघा शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया, जिसका अनुमानित मूल्य करीब दो करोड़ रुपये बताया गया है। वहीं, हाल ही में अंबेडकर रोड क्षेत्र में लगभग चार लाख वर्ग फीट शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर नगर पालिका के स्वामित्व में लेने की कार्रवाई की गई। इस भूमि का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 500 करोड़ रुपये बताया गया है। यह कार्रवाई शासकीय संपत्तियों के संरक्षण और सार्वजनिक संसाधनों पर शासन के वैधानिक अधिकार को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। इतनी बड़ी भूमि को सुरक्षित करना भविष्य में शहरी विकास, नियोजन और सार्वजनिक उपयोग की संभावनाओं के लिहाज से भी अहम है। निर्वाचन प्रबंधन में सम्मान, सैनिक कल्याण में योगदान किसी जिले की प्रशासनिक क्षमता का आकलन केवल विकास कार्यों से नहीं, बल्कि निर्वाचन जैसी संवेदनशील और व्यापक जिम्मेदारियों के निर्वहन से भी होता है। एसआईआर-2026 के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्यों के लिए कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय मतदाता दिवस समारोह में महामहिम राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल द्वारा सम्मानित किए जाने की जानकारी दी गई है। इसी प्रकार, आर्म्ड फोर्सेज फ्लैग डे फंड में निर्धारित लक्ष्य से अधिक राशि संग्रहित करने के लिए उन्हें लोकभवन में सम्मान प्राप्त हुआ। निर्वाचन प्रबंधन में जिम्मेदारी का निर्वहन और सैनिक कल्याण के लिए आर्थिक सहयोग जुटाने के प्रयास प्रशासन की उन भूमिकाओं को सामने लाते हैं, जिनका प्रभाव लोकतांत्रिक व्यवस्था और राष्ट्र के प्रति सामाजिक दायित्व से जुड़ा है। जब प्रशासनिक पद के साथ जुड़ती हैं मानवीय संवेदनाएं किसी अधिकारी की कार्यक्षमता का मूल्यांकन उपलब्धियों और आंकड़ों से किया जा सकता है, लेकिन उसकी संवेदनशीलता का वास्तविक परिचय उन अवसरों पर मिलता है, जब कोई जरूरतमंद सहायता की उम्मीद लेकर प्रशासन तक पहुंचता है। जनसुनवाई के दौरान एक दिव्यांग युवक को मौके पर ही नई ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराया जाना ऐसी ही पहल का उदाहरण है। इसी तरह, “हमारी आंगनवाड़ी, पोषण भी पढ़ाई भी” अभियान के अंतर्गत कलेक्टर श्री चंद्रा का स्वयं जमीन पर बैठकर बच्चों को पढ़ाना प्रशासन के उस मानवीय पक्ष को सामने लाता है, जो औपचारिक बैठकों और सरकारी आदेशों से आगे बढ़कर समाज के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है। एक जरूरतमंद के लिए समय पर मिली सहायता केवल एक सुविधा नहीं होती; वह व्यवस्था के प्रति विश्वास जगाने वाला अनुभव भी बन सकती है। इसी प्रकार, बच्चों के बीच बैठकर उन्हें पढ़ाना इस संदेश को मजबूत करता है कि शिक्षा, पोषण और बाल विकास केवल विभागीय जिम्मेदारियां नहीं, बल्कि समाज के भविष्य से जुड़े विषय हैं। इन प्रसंगों में प्रशासनिक पद की गरिमा के साथ सहजता, संवेदना और व्यक्तिगत सहभागिता का भाव दिखाई देता है। नीमच के प्रशासनिक इतिहास में एक उल्लेखनीय कार्यकाल नीमच जिले के प्रशासनिक इतिहास में प्रथम कलेक्टर श्री प्रभात कुमार पाराशर और द्वितीय कलेक्टर के रूप में पदस्थ रहे तथा वर्तमान में अपर मुख्य सचिव श्री अनुपम राजन का भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, दोनों के लगभग तीन-तीन वर्ष के कार्यकाल के बाद श्री हिमांशु चंद्रा उन अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने जिले में अपेक्षाकृत लंबी अवधि तक कलेक्टर के रूप में सेवाएं दी हैं। किसी जिले में लंबे समय तक पदस्थापना प्रशासनिक योजनाओं को निरंतरता देने और विकास कार्यों की प्रगति पर नजर बनाए रखने का अवसर प्रदान करती है। इस अवधि में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, योजनाओं की समीक्षा, जनसमस्याओं का निराकरण और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को धरातल पर उतारना महत्वपूर्ण हो जाता है। श्री चंद्रा के कार्यकाल में सामने आए राजस्व प्रबंधन, जल संरक्षण, अतिक्रमण मुक्ति और जनकल्याण से जुड़े उदाहरण इसी व्यापक प्रशासनिक भूमिका के विभिन्न पक्षों को रेखांकित करते हैं। कुशल नेतृत्व की असली पहचान: परिणाम के साथ भरोसा एक जिले का कलेक्टर केवल शासन और प्रशासन के बीच की कड़ी नहीं होता, बल्कि वह जिले की प्रशासनिक दिशा, विभागीय समन्वय और जनसमस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस पद पर निर्णय लेने की क्षमता जितनी आवश्यक है, उतना ही जरूरी है जनता की समस्याओं को सुनना, परिस्थितियों को समझना और उपलब्ध संसाधनों के भीतर प्रभावी समाधान तलाशना। कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा के कार्यकाल से जुड़े इन उदाहरणों में प्रशासनिक दृढ़ता और जनसंवेदनशीलता के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास दिखाई देता है। राजस्व प्रकरणों के निराकरण में उपलब्धि, शासकीय भूमि की सुरक्षा, जल संरक्षण के लिए नवाचार और जरूरतमंदों की सहायता—ये सभी पहल सुशासन के अलग-अलग आयाम हैं। हालांकि, किसी भी प्रशासनिक कार्यकाल का समग्र मूल्यांकन करते समय उपलब्धियों के साथ नागरिकों की संतुष्टि, योजनाओं के दीर्घकालीन परिणाम और समस्याओं के स्थायी समाधान को भी महत्व दिया जाना चाहिए। यही वह कसौटी है, जिस पर सुशासन की सार्थकता निरंतर मजबूत होती है। पद से आगे बढ़कर जनसेवा की पहचान जगदीश मालवीय, आगर मालवा के शब्दों में, कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा की कार्यशैली में प्रशासनिक क्षमता के साथ जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता, संवाद और समन्वय का पक्ष विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उनके अनुसार, एक अधिकारी की वास्तविक पहचान केवल उसके पद या अधिकारों से नहीं, बल्कि इस बात से बनती है कि वह अपने दायित्वों का निर्वहन किस भावना से करता है और आमजन की समस्याओं के प्रति कितना संवेदनशील रहता है। आज प्रशासन से जनता की अपेक्षाएं पहले से कहीं अधिक हैं। लोग चाहते हैं कि उनकी समस्याएं सुनी जाएं, सरकारी काम समय पर हों, सार्वजनिक संपत्तियां सुरक्षित रहें और जरूरतमंदों को सहायता के लिए अनावश्यक भटकना न पड़े। ऐसे में प्रशासनिक दक्षता के साथ मानवीय दृष्टिकोण का समन्वय विशेष महत्व रखता है। नीमच में कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा के कार्यकाल से जुड़े ये प्रसंग इसी अपेक्षा की याद दिलाते हैं। राजस्व से लेकर जल संरक्षण तक, अतिक्रमण मुक्ति से लेकर जनसुनवाई तक और निर्वाचन दायित्वों से लेकर बच्चों के बीच पहुंचने तक—प्रशासन की भूमिका अनेक रूपों में सामने आती है। सुशासन की सार्थकता केवल बड़े निर्णयों में नहीं, बल्कि उस भरोसे में भी होती है, जो आम नागरिक के मन में व्यवस्था के प्रति पैदा होता है। जब प्रशासन नियमों के प्रति दृढ़, कार्यों के प्रति जवाबदेह और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील होता है, तभी जनसेवा अपने वास्तविक अर्थों में साकार होती है। कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा के कार्यकाल से जुड़े प्रयासों और अनुभवों को देखते हुए यही अपेक्षा की जा सकती है कि नीमच जिले में पारदर्शिता, जवाबदेही, नवाचार और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित प्रशासनिक पहल आगे भी निरंतरता के साथ आगे बढ़ती रहें। — जगदीश मालवीय, आगर मालवा |