रतलाम/पिपलोदा। ग्राम पंचायत आक्यादेह में कथित भ्रष्टाचार और शासकीय राशि के दुरुपयोग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब कलेक्टर कार्यालय तक पहुंच गया है। ग्रामवासी गिरवर सिंह सहित समस्त ग्रामीणों ने 12 सितंबर 2026 को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर शिकायत आवेदन सौंपते हुए पंचायत के विभिन्न विकास कार्यों और शासकीय योजनाओं में गंभीर अनियमितताओं की जांच की मांग की है। शिकायत में स्ट्रीट लाइट, नाली, सड़क, चबूतरा, सरकारी कुएं, आवास, संबल और अंत्येष्टि सहायता सहित कई मामलों में कथित फर्जीवाड़े के आरोप लगाए गए हैं।
ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में ग्राम पंचायत आक्यादेह (LGD 146490), जनपद पंचायत पिपलोदा में हुए कार्यों के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान कराने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि कागजों में दर्ज कार्यों और जमीन पर हुए कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए तो कथित अनियमितताओं की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
₹1.79 लाख की स्ट्रीट लाइट, गांव में पुरानी लाइटों से काम चलने का आरोप
शिकायत का सबसे प्रमुख बिंदु कार्य ID 128649514 से जुड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार इस कार्य में करीब ₹1,79,000 की स्ट्रीट लाइट का भुगतान दर्शाया गया है, लेकिन गांव में उक्त राशि के अनुरूप नई लाइटें नहीं लगी हैं। शिकायत में कहीं लाइट नहीं होने तो कहीं घटिया लाइट लगाए जाने तथा वर्तमान में पुरानी लाइटों से काम चलने का आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों ने भुगतान से जुड़े बिल-वाउचर, कार्यादेश, सामग्री की खरीदी, स्टॉक रिकॉर्ड और मौके पर लगी लाइटों का सत्यापन कराने की मांग की है।
एक ही नाम की अलग-अलग प्रविष्टियों पर भी सवाल
ग्रामीणों ने पंचायत ऐप की एक प्रविष्टि को भी जांच का विषय बनाया है। शिकायत के अनुसार 12 दिसंबर 2022 की प्रविष्टि में ईश्वरलाल नाम से अलग-अलग भूमिकाओं से जुड़ी प्रविष्टियां दिखाई देने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने इसे गंभीरता से लेते हुए मेरी पंचायत ऐप की Edit History और संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
60 वर्ष की उम्र के बाद भी काम और GRS की ID के इस्तेमाल का आरोप
शिकायत में पंचायत के चपरासी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद भी उससे कार्य कराया जा रहा है तथा कथित रूप से GRS के कार्य जैसे मस्टर रोल भरना और जियो-टैग फोटो अपलोड करना कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने GRS की ID के इस्तेमाल की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
₹70 हजार के चबूतरे पर ₹1.21 लाख का बिल लगाने का आरोप
शिकायत में चबूतरा निर्माण भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों ने चबूतरे की अनुमानित लागत करीब ₹70 हजार बताते हुए आरोप लगाया है कि पंचायत रिकॉर्ड में इसके लिए करीब ₹1.21 लाख का बिल लगाया गया और भुगतान प्राप्त किया गया। इसी के साथ एक सड़क के निर्माण के बाद अन्य सड़क के बिल भी पास कराने का आरोप लगाया गया है।
यह बिंदु भी अब जांच में महत्वपूर्ण रहेगा कि स्वीकृत कार्य, वास्तविक निर्माण, माप पुस्तिका, सामग्री और भुगतान रिकॉर्ड में कितना सामंजस्य है।
निजी नाली के निर्माण को पंचायत भुगतान से जोड़ने का आरोप
ग्रामीणों ने गिरवर सिंह द्वारा निजी स्तर पर नाली निर्माण किए जाने का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया है कि पंचायत के जिम्मेदारों द्वारा कथित रूप से उसी कार्य से संबंधित बिल बनाकर राशि प्राप्त की गई। शिकायतकर्ताओं ने मौके के जियो-टैग फोटो, माप पुस्तिका, बिल और भुगतान रिकॉर्ड की जांच की मांग की है।
आवास, संबल और अंत्येष्टि सहायता में भी पैसे लेने के आरोप
शिकायत केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों ने शासकीय आवास योजना, संबल योजना और अंत्येष्टि सहायता राशि को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
आवेदन में आरोप है कि कुछ हितग्राहियों से पैसे लेकर आवास का लाभ दिलाया गया तथा पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ नहीं मिलने की शिकायत की गई है। इसी प्रकार अंत्येष्टि सहायता राशि और संबल योजना में भी पात्र व्यक्ति को लाभ नहीं मिलने तथा कथित रूप से पैसे लेकर लाभ दिलाने के आरोप लगाए गए हैं।
इन आरोपों की पुष्टि के लिए हितग्राही सूची, स्वीकृति आदेश, भुगतान की बैंकिंग जानकारी और संबंधित रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है।
सरकारी कुएं पर जाली के नाम पर भुगतान, मौके पर जाली नहीं होने का दावा
ग्रामीणों ने सरकारी कुएं पर जाली निर्माण को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। शिकायत के अनुसार जाली निर्माण के नाम पर राशि प्राप्त की गई, लेकिन मौके पर जाली नहीं लगी है। ग्रामीणों ने इस मामले में भी भुगतान रिकॉर्ड के साथ मौके का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।
सड़क, नाली, गड्ढे और बावड़ी की बदहाली पर भी पंचायत को घेरा
ग्रामीणों ने गांव में घटिया सड़क निर्माण, सड़कों के गड्ढों की मरम्मत नहीं होने और नियमित नाली सफाई नहीं कराने का आरोप लगाया है। शिकायत में कहा गया है कि जहां स्ट्रीट लाइट और नाली निर्माण की सबसे अधिक जरूरत है, वहां कार्य नहीं कराया जा रहा।
गांव के बीच स्थित क्षतिग्रस्त बावड़ी (नावड़ी) के जीर्णोद्धार की मांग
भी ग्रामीणों ने उठाई है। उनका कहना है कि मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं।
मनमाने तरीके से काम और ग्रामीणों से अभद्र व्यवहार का आरोप
शिकायतकर्ताओं ने पंचायत के जिम्मेदारों पर ग्रामीणों से बातचीत नहीं करने, कथित अभद्र भाषा का उपयोग करने और मनमाने तरीके से कार्य करने के आरोप भी लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इससे आमजन परेशान हैं और पंचायत के कार्यों को लेकर उनमें असंतोष है।
अब जांच की आंच में आएगा पूरा रिकॉर्ड
ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। इसके लिए पंचायत दर्पण, मेरी पंचायत ऐप की Edit History, मूल उपस्थिति रजिस्टर, मस्टर रोल, जियो-टैग लोकेशन, कार्यों की माप पुस्तिका, स्वीकृति आदेश, बिल-वाउचर, भुगतान रिकॉर्ड और मौके पर किए गए निर्माण कार्यों की जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायत के साथ राशि निकासी से संबंधित बिल और कथित फर्जी कार्यों के फोटो प्रमाण संलग्न किए जाने का उल्लेख भी आवेदन में किया गया है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित सरपंच, सचिव, सहायक सचिव/GRS सहित अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए और शासकीय राशि की वसूली की जाए।
शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन, लोकायुक्त मध्यप्रदेश भोपाल, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, प्रमुख सचिव ऊर्जा विभाग तथा कलेक्टर रतलाम को भेजे जाने का भी आवेदन में उल्लेख है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आक्यादेह पंचायत में कागजों पर दर्ज कार्य और जमीन पर मौजूद कार्यों में कितना अंतर है? ग्रामीणों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब रिकॉर्ड की जांच और मौके के भौतिक सत्यापन से ही सामने आएगा। प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी वास्तविकता है और किस स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत