बैतूल। जादू-टोने के जरिए करोड़ों रुपये कमाने के लालच में बापुसिंह परतेती की हत्या करने के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट बैतूल श्री रईस खान की अदालत ने चार आरोपियों को हत्या, अपहरण और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी ठहराते हुए विभिन्न धाराओं में कठोर सजा सुनाई है। न्यायालय ने धारा 302 भादवि में आजीवन कारावास एवं 1000 रुपये अर्थदंड, धारा 364 में 10 वर्ष का कठोर कारावास एवं 1000 रुपये अर्थदंड, धारा 120-बी में आजीवन कारावास एवं 1000 रुपये अर्थदंड तथा धारा 201 में 3 वर्ष का कठोर कारावास एवं 500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
मामला 9 मार्च 2020 का है। चौपनिया के जंगल में सड़क किनारे एक व्यक्ति का शव मिलने की सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। मृतक के सिर पर गंभीर चोटें थीं। जांच के दौरान मृतक की पहचान बापुसिंह परतेती निवासी कुर्सीढाना, थाना लावाघोघरी, जिला छिंदवाड़ा के रूप में हुई।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी मंशाराम गांव में टोने-टोटके करता था और मृतक से रंजिश रखता था। उसने अन्य आरोपियों को जादू-टोने के जरिए करोड़ों रुपये दिलाने का लालच दिया तथा बापुसिंह को रास्ते से हटाने की साजिश रची।
8 मार्च 2020 को रजनीकान्त उर्फ रमन शर्मा, ऋषभ कापसे उर्फ ऋषु और विजेन्द्र रैकवार उर्फ गोल्डी कार से कुर्सीढाना पहुंचे। आरोपियों ने शादी में बेंजो बजाने के बहाने बापुसिंह को अपने साथ बैठाया। गांव से करीब 15-20 किलोमीटर दूर उसकी रस्सी से गला दबाकर तथा सिर पर वार कर हत्या कर दी गई। इसके बाद शव को कार की डिक्की में रखकर बैतूल लाया गया, जहां मंशाराम मिला। पुलिस के अनुसार शव पर कथित तांत्रिक क्रिया करने के बाद उसे खेड़ी सांवलीगढ़ से आगे जंगल में सड़क किनारे फेंक दिया गया।
पुलिस ने विवेचना के दौरान आरोपियों को गिरफ्तार कर प्रकरण में एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ीं और न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। प्रकरण के आरोपी मंशाराम की बाद में मृत्यु हो गई।
विशेष न्यायाधीश श्री रईस खान ने 7 सितंबर 2026 को निर्णय सुनाते हुए आरोपियों को दोषी ठहराया। प्रकरण का सफल अभियोजन विशेष लोक अभियोजक श्री शशिकान्त नागले ने किया। प्रकरण की सम्पूर्ण विवेचना तत्कालीन उपनिरीक्षक **कपिल सौराष्ट्रीय, थाना कोतवाली बैतूल** द्वारा की गई।