रतलाम / बाजना। रत्नपुरी ग्राम भारती शिक्षा समिति जिला रतलाम द्वारा संचालित सरस्वती शिशु मंदिर बाजना में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के पावन अवसर पर जन्माष्टमी उत्सव बड़े ही हर्षोल्लास, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। विद्यालय परिसर में भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और उल्लास का ऐसा रंग देखने को मिला कि पूरा वातावरण नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयकारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री महेश गोस्वामी द्वारा भैया-बहिनों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व की जानकारी देने के साथ हुआ। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनके आदर्शों, कर्मयोग और धर्म की स्थापना के संदेश पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
इसके पश्चात विद्यालय के नन्हे भैया-बहिनों को राधा-कृष्ण के मनमोहक स्वरूप में सजाया गया। राधा-कृष्ण के रूप में सजे बच्चों का विद्यालय परिवार द्वारा आत्मीय स्वागत एवं सत्कार किया गया। बच्चों की मनमोहक वेशभूषा और आकर्षक रूप ने सभी का मन मोह लिया तथा विद्यालय परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो गया।
जन्माष्टमी उत्सव का मुख्य आकर्षण मटकी फोड़ प्रतियोगिता रही। प्रतियोगिता में विद्यालय के भैया-बहिनों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी प्रतिभा और साहस का प्रदर्शन किया। विद्यालय परिसर में ऊंचाई पर मटकी बांधी गई, जिसे भैया ने उत्साह और उमंग के साथ प्रयास करते हुए फोड़ा। मटकी फूटते ही परिसर जय श्रीकृष्ण के जयकारों और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
मटकी फोड़ कार्यक्रम के पश्चात भगवान श्री राधा-कृष्ण की विधिवत आरती उतारी गई। विद्यालय परिवार एवं विद्यार्थियों ने श्रद्धापूर्वक आरती में सहभागिता की। इसके बाद सभी विद्यार्थियों एवं उपस्थितजनों को प्रसाद वितरित किया गया।
कार्यक्रम को सफल एवं व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में विद्यालय के पूरे आचार्य परिवार का सराहनीय सहयोग रहा। इस अवसर पर विद्यालय के आचार्य सत्तू डामोर, सावल सिंह चारेल, संगीता गोस्वामी, निर्मला चारेल, श्रद्धा डिंडोर, स्वाति डिंडोर, अरिहंता भगोरा, बिंदिया वाघेला, रानी मईडा, काली चरपोटा एवं रितिका जमोनिया सहित विद्यालय परिवार की उपस्थिति रही।
जन्माष्टमी उत्सव ने विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों के प्रति श्रद्धा एवं संस्कारों को और अधिक मजबूत करने का संदेश दिया। पूरे कार्यक्रम में भक्ति, उल्लास और संस्कारों का सुंदर संगम देखने को मिला।