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चीताखेड़ा । विगत 15 दिनों की लंबी खेंच के बाद इंद्रदेव का दिल पसीज ही गया। मंगलवार दोपहर को क्षेत्र में भरपूर बारिश हेतु सीतलामाता और खेड़ा देवत बालाजी मंदिर पर ज्यौतिषाचार्य प्रवीण पण्डिया द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान पूर्वक इंद्र हवन पूजन किया गया। दोपहर बाद बुंदाबांदी से शुरू हुई रिमझिम बारिश चली जिससे वेंटीलेटर पर सांसें ले रही खरीफ सीजन की फसले पूरी तरह यौवन पर है और सोयाबीन के पौधों पर फूल फलियां का समय चल रहा है ऐसे में बारिश की शक्त आवश्यकता थी। फसलों को संजीवनी बूटी मील ही गई, लहलहाती फसलों को देख मुस्कराया धरती का पालनहार। अंचल में विगत दिनों पूर्व टूकडों टूकडों में हुई अपर्याप्त बारिश में ही किसानों ने खेतों में बुवाई कर दी थी, लेकिन बुवाई करते ही बारिश होने से बीज अंकुरित नहीं हो सका। 40 प्रतिशत किसानों ने खेतों में कम बारिश से बीज अंकुरित नहीं हो सका जिससे किसी ने दो बार तो किसी ने तीन-तीन बार बुवाई करनी पड़ी। दो और तीसरी बार बुवाई करने के बाद बारिश नहीं हुई थी उन किसानों की बारिश के इंतजार में सांसें ऊपर-नीचे हो रही थी। वैसे कई दिनों से आसमान में बादल तो उमड़-घुमड़ कर रहे थे पर बरस नहीं रहे थे। फसलें पूरे योवन पर है सोयाबीन के पौधों में इन दिनों फूल फलियां आ रही है ऐसे में बारिश की शक्त आवश्यकता है। अगर यह बारिश नहीं होती तो पैदावारी में अंकुश लग जाता। मंगलवार को दोपहर होते-होते इंद्रदेव आखिर पसीज ही गए और बरस ही पड़े। फसलों को नया जीवन और किसानों को संतुष्टि मिली। खेतों में लहलहा उठी फसलें उन्हें देख किसानों का नाच उठा मन मयूर। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |