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जन विश्वास अभियान में बच्चे की आवाज पर भारी पड़ी ऊंची आवाज! गरोठ। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत 21 अगस्त 2026 को ग्राम पंडरिया में आयोजित कार्यक्रम उस समय चर्चा में आ गया, जब एक विद्यार्थी ने जिला कलेक्टर के सामने अपने गांव की जमीनी समस्याएं खुलकर रखीं। विद्यार्थी ने बताया कि गांव में नालियां और रास्ते नियमित रूप से साफ नहीं होते हैं। वहीं ग्राम साठखेड़ा जाने वाला मार्ग बरसात के दिनों में बेहद खराब हो जाता है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। विद्यार्थी प्रशासन के सामने अपनी बात रख रहा था। वह कोई राजनीतिक भाषण नहीं दे रहा था और न ही किसी व्यक्ति पर व्यक्तिगत आरोप लगा रहा था। वह अपने गांव की उन समस्याओं को बता रहा था, जिन्हें ग्रामीण रोजमर्रा की जिंदगी में झेल रहे हैं। इसी दौरान कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक श्री चंदरसिंह सिसोदिया की प्रतिक्रिया चर्चा का विषय बन गई। सामने आए वीडियो में विधायक की ओर से ऊंची आवाज में “किसका लड़का है, किसका लड़का है” कहते हुए सवाल किए जाने की आवाज सुनाई देती है। इसके बाद सरपंच के संबंध में भी पूछताछ किए जाने की आवाज सुनाई देती है। वीडियो का यह अंश अब लोगों के बीच सवाल खड़े कर रहा है कि जब एक बच्चा जिला प्रशासन के सामने अपने गांव की समस्या रखने आया था, तब उसकी बात को शांतिपूर्वक पूरा सुनने का माहौल क्यों नहीं बन सका? सवाल बच्चे की आवाज का नहीं, गांव की समस्या का है यह मामला केवल एक बालक और जनप्रतिनिधि के बीच संवाद का नहीं है। असली सवाल उस अभियान की भावना का है, जिसका उद्देश्य आमजन के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को सुनना और उनके समाधान की दिशा में कार्रवाई करना है। जब जन विश्वास अभियान में एक विद्यार्थी स्वयं आगे आकर सड़क, सफाई व्यवस्था और बरसात के दौरान दुर्घटना के खतरे जैसी मूलभूत समस्याएं जिला प्रशासन के सामने रखता है, तो क्या उसकी बात को सबसे पहले सम्मान और धैर्य के साथ सुना जाना अपेक्षित नहीं है? एक बच्चे की जुबान से निकली शिकायत को हल्के में लेना आसान हो सकता है, लेकिन उसके पीछे छिपी गांव की समस्या को नजरअंदाज करना आसान नहीं होना चाहिए। यदि सड़क खराब है तो उसका असर केवल उस विद्यार्थी तक सीमित नहीं रहता। इससे गांव के विद्यार्थियों, किसानों, महिलाओं, बुजुर्गों और रोजाना आवागमन करने वाले ग्रामीणों को परेशानी होती है। इसी तरह यदि नालियों और रास्तों की नियमित सफाई नहीं होती है तो उसका असर पूरे गांव की स्वच्छता और स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ता है। जन विश्वास आखिर बनेगा कैसे? यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सवाल है। जनता की समस्याएं सुनने के लिए अभियान चलाया जा रहा हो और उसी दौरान समस्या बताने वाला एक बच्चा यदि दबाव या असहजता महसूस करे, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि आम ग्रामीण प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी बात कितनी सहजता से रख पाएगा? जन विश्वास केवल सरकारी कार्यक्रम आयोजित करने से नहीं बनता। जन विश्वास तब बनता है, जब आम नागरिक को यह भरोसा हो कि वह अपनी समस्या बिना किसी भय या दबाव के जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने रख सकता है। शिकायत को राजनीतिक चश्मे से नहीं, समस्या के रूप में देखा जाए ग्राम पंडरिया के विद्यार्थी ने जो बात कही, उसे किसी राजनीतिक विवाद के चश्मे से देखने के बजाय गांव की वास्तविक समस्या के रूप में देखा जाना चाहिए। जिला प्रशासन यदि इस शिकायत को गंभीरता से लेकर गांव की सड़क और सफाई व्यवस्था की मौके पर जांच कराए तथा बरसात के दिनों में साठखेड़ा मार्ग पर दुर्घटना के खतरे को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए, तो इससे न केवल ग्रामीणों की समस्या का समाधान होगा, बल्कि जन विश्वास अभियान की भावना भी मजबूत होगी। सामने आए वीडियो में सुनाई देने वाली आवाजों और घटनाक्रम ने अब एक सीधा सवाल खड़ा कर दिया है— क्या जन विश्वास अभियान केवल समस्याएं सुनने का कार्यक्रम है, या समस्याएं बताने वाले हर व्यक्ति को निर्भय होकर बोलने का विश्वास भी देगा? क्योंकि जन विश्वास मंच, भाषण और नारों से नहीं बनता। जन विश्वास तब बनता है, जब गांव का एक छोटा बच्चा भी अपनी बात जिला कलेक्टर के सामने बिना डरे कह सके और उसकी बात को समाधान की दिशा में आगे बढ़ाया जाए। रिपोर्ट : विनोद धाकड़ |