रतलाम। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर त्रक धा म्यूजिकल ग्रुप द्वारा आयोजित सम्मान समारोह श्रद्धा, सम्मान और सुरों की मधुर छटा से सराबोर रहा। कार्यक्रम में ग्रुप के संस्थापक एवं गुरु देव विष्णु प्रसाद कण्डारे (देव सर) का पुष्पहार, शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर भव्य सम्मान किया गया। पूरे आयोजन में गुरु-शिष्य परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहाँ कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से वातावरण को संगीतमय बना दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत गुरु वंदना के साथ हुई। सामाजिक न्याय एवं निशक्तजन कल्याण विभाग रतलाम की उपसंचालक संध्या शर्मा ने अजीब दास्तां है ये एवं ये रातें हैं मौसम, नदी का किनारा गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर खूब तालियाँ बटोरीं। बीआरसी सुरेखा माना ने ज़रा हौले-हौले चलो मेरे सजना, अशोक मेहता ने बेकरार करके हमें यूँ न जाइए राजेश माना ने तुमको देखा तो ये ख़याल आया, रतन चौहान ने ये तो सच है कि भगवान है कृष्णाकांत महावर ने "रिमझिम के गीत सावन गाए तथा गीता बोरासी ने अक्सर इस दुनिया में गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक क्षण तब आया जब देव सर और गीता बोरासी ने युगल गीत इन नशीली आँखों से... प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति ने पूरे सभागार को तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान कर दिया। वहीं कृष्णा सोनगरा ने भावपूर्ण कविता का सस्वर पाठ किया और बालकृष्ण तिवारी ने अपनी स्वरचित रचना सुनाकर उपस्थितजनों का मन जीत लिया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि देव सर ने त्रक धा म्यूजिकल ग्रुप के माध्यम से अनेक नई प्रतिभाओं को मंच देकर उनके सपनों को नई उड़ान दी है। जिन कलाकारों ने कभी मंच पर प्रस्तुति देने की कल्पना भी नहीं की थी, आज वे देव सर के मार्गदर्शन में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। उनके सरल व्यक्तित्व, विनम्र स्वभाव और संगीत के प्रति समर्पण की सभी ने मुक्त कंठ से सराहना की।
कार्यक्रम का प्रभावी एवं रोचक संचालन देवेंद्र सिंह भदौरिया ने किया। अंत में अशोक मेहता एवं स्वेच्छा विश्वकर्मा ने सभी अतिथियों, कलाकारों और संगीत प्रेमियों का आभार व्यक्त किया। समारोह में रवि जैन, दीपिका मालवी, स्वेच्छा, राकेश, अशोक बोरासी, हितेश सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।
गुरु पूर्णिमा के इस भव्य आयोजन ने न केवल गुरु-शिष्य परंपरा को सम्मानित किया, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि सच्चा गुरु अपनी प्रतिभा से अधिक अपने शिष्यों की सफलता में आनंद महसूस करता है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत