करीब 72 करोड़ रुपये की परियोजना से वर्षों पुरानी मांग पूरी होने की उम्मीद, अब समय पर निर्माण सबसे बड़ी चुनौती : पूर्व विधायक डाक्टर सम्पत स्वरूप जाजू
नीमच जिले के लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लगभग पाँच वर्षों के लंबे इंतजार के बाद पश्चिम रेलवे के रतलाम रेल मंडल ने बघाना (एल-क्रॉसिंग क्रमांक 120) एवं हिंगोरिया (एल-क्रॉसिंग क्रमांक 125) सहित कुल पाँच रेल फाटकों पर दो लेन रेल ओवरब्रिज (ROB) निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं।
जारी निविदा के अनुसार इस परियोजना की अनुमानित लागत 71 करोड़ 97 लाख 22 हजार 236 रुपये निर्धारित की गई है। टेंडर 3 अगस्त 2026 तक आमंत्रित किए गए हैं तथा कार्य पूर्ण करने की समय-सीमा 18 माह तय की गई है। यदि प्रक्रिया समय पर पूरी होती है तो नीमच शहर की वर्षों पुरानी यातायात समस्या का बड़ा समाधान सामने आ सकता है।
बघाना और हिंगोरिया रेलवे फाटक लंबे समय से आमजन, व्यापारियों, विद्यार्थियों और मरीजों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। दिनभर ट्रेनों की आवाजाही के दौरान फाटक बंद रहने से लंबा जाम लगता है, जिससे लोगों का समय और ईंधन दोनों बर्बाद होते हैं। रेल ओवरब्रिज बनने से यातायात सुगम होगा और दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी।
हालांकि जनता के मन में एक बड़ा सवाल भी है। कहीं इन रेल ओवरब्रिजों का हाल बड़ी सादड़ी–नीमच रेल लाइन परियोजना जैसा तो नहीं होगा? इस रेल लाइन का शिलान्यास वर्ष 2018 में हुआ था और इसे 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी परियोजना आज तक पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकी। ऐसे में लोगों को आशंका है कि कहीं यह महत्वाकांक्षी परियोजना भी केवल कागजों तक सीमित न रह जाए।
अब जिम्मेदारी केवल रेलवे प्रशासन की ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की भी है। जनता को उम्मीद है कि सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि इस परियोजना की नियमित निगरानी करेंगे, ताकि टेंडर प्रक्रिया शीघ्र पूरी हो, निर्माण समय पर शुरू हो और तय समय-सीमा के भीतर रेल ओवरब्रिज बनकर जनता को समर्पित किए जा सकें।
यदि इस बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने गंभीरता दिखाई, तो बघाना और हिंगोरिया के रेल ओवरब्रिज नीमच की यातायात व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकते हैं।
संपादकीय टिप्पणी
टेंडर जारी होना विकास की शुरुआत है, मंजिल नहीं। अब जनता की निगाहें रेलवे प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर हैं कि वे इस महत्वाकांक्षी परियोजना को कागजों से निकालकर धरातल पर कब उतारते हैं। समय पर निर्माण ही इस घोषणा की वास्तविक सफलता होगी।