रतलाम। सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को समय पर बेहतर और निशुल्क उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुक्रवार को रतलाम के न्यू कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में प्रधानमंत्री राहत योजना के संबंध में निजी अस्पताल प्रबंधकों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह के निर्देशानुसार आयोजित इस बैठक में अपर कलेक्टर बृजेंद्र कुमार रावत तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. किरण वाडिवा ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और अधिक से अधिक अस्पतालों को इससे जोड़ने पर विशेष जोर दिया।
बैठक के दौरान डीआईओ एनआईसी श्रेय भावसार तथा डीएएम एनआईसी रोहित भट्ट ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को दुर्घटना के बाद सात दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने की स्थिति में डेढ़ लाख रुपये तक का पूरी तरह निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया कि दुर्घटना के बाद 24 घंटे के भीतर अस्पताल में भर्ती होना अनिवार्य है तथा पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संचालित होती है। अस्पतालों को समय पर प्री-अप्रूवल की कार्रवाई पूरी करने के निर्देश भी दिए गए ताकि पात्र मरीजों को तत्काल योजना का लाभ मिल सके।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि रतलाम जिले में अब तक इस योजना के तहत 22 प्रकरणों में 4 लाख 13 हजार 465 रुपये की स्वीकृति जारी की जा चुकी है तथा संबंधित अस्पतालों के खातों में राशि भी हस्तांतरित की जा चुकी है। बैठक में बताया गया कि जिले के मेडिकल कॉलेज जिला चिकित्सालय और सिविल अस्पताल सहित अन्य शासकीय अस्पताल पहले से ही योजना में इंपैनल्ड हैं।
निजी अस्पतालों में आरोग्यं हॉस्पिटल कॉलेज रोड रतलाम आशीर्वाद नर्सिंग होम काटजू नगर रतलाम आयुष्मान सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल महू रोड रतलाम श्रद्धा हॉस्पिटल काटजू रोड रतलाम केके शाह हॉस्पिटल काटजू नगर रतलाम शंकुश हॉस्पिटल महू रोड रतलाम जीडी हॉस्पिटल 80 फीट रोड रतलाम जैन दिवाकर श्री अरविंदो हॉस्पिटल सागोद रोड रतलाम राघव न्यूरो ट्रॉमा सेंटर सैलाना रोड रतलाम तथा सरदार पटेल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर जावरा को योजना में इंपैनल्ड किया जा चुका है।
बैठक को संबोधित करते हुए अपर कलेक्टर बृजेंद्र कुमार रावत ने जिले के सभी निजी अस्पताल संचालकों और प्रबंधकों से अपील की कि जो अस्पताल अभी तक योजना से नहीं जुड़े हैं वे शीघ्र इंपैनलमेंट के लिए आवेदन करें ताकि दुर्घटना पीड़ितों को समय पर उपचार मिल सके और किसी भी जरूरतमंद को आर्थिक अभाव के कारण इलाज से वंचित न रहना पड़े।
कार्यक्रम के दौरान योजना के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश मंडलोई आनंदीलाल जैन पुलिस विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा जिले के विभिन्न निजी अस्पतालों के प्रबंधक उपस्थित रहे। बैठक में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक पात्र दुर्घटना प्रकरण में योजना का लाभ सुनिश्चित करना सभी संबंधित संस्थाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसके लिए अस्पतालों को ऑनलाइन प्रक्रिया का पूर्ण पालन करना होगा। पीएम राहत योजना को जिले में अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है ताकि सड़क दुर्घटना के प्रत्येक पीड़ित को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत