रतलाम
रतलाम जिले तहसील रतलाम के ग्राम बेरछा में जल निकासी व्यवस्था को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। लगातार बारिश के बीच गांव के 8 से 10 परिवार जलभराव के खतरे के साए में जीवन बिताने को मजबूर हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ग्रामीण पिछले दो से तीन माह से ग्राम पंचायत से लेकर जनसुनवाई और जिला प्रशासन तक लगातार गुहार लगा रहे हैं लेकिन आज तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। अब बारिश का दौर शुरू होने के साथ स्थिति दिन प्रतिदिन भयावह होती जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से खेतों की ओर जाने वाली प्राकृतिक नाली (खार) से वर्षा का पानी आसानी से नहीं निकला जाता है जिस कारण पानी का बहाव बाधित हो गया है। अब बारिश का पानी सीधे मकानों की ओर आने लगा है जिससे घरों में जलभराव की स्थिति बन रही है और लोगों में दहशत का माहौल है।
प्रभावित ग्रामीण अमृतलाल पोरवाल आनंदीलाल पोरवाल और श्रीमती बबीता बाई सहित अन्य परिवारों ने इस संबंध में जिला कलेक्टर को आवेदन देकर समस्या से अवगत कराया है। उनका आवेदन 30 जून 2026 को जनसुनवाई में पंजी क्रमांक 51530 पर दर्ज किया गया है। इससे पहले भी 22 मई 2026 को आवेदन प्रस्तुत कर प्रशासन को संभावित खतरे से अवगत कराया गया था। इसके बावजूद आज तक मौके पर स्थायी समाधान नहीं हो पाया।
ग्रामीणों का कहना है कि दो से तीन माह से वे पंचायत कार्यालय जनपद पंचायत और कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगाते लगाते थक चुके हैं। हर बार केवल आश्वासन मिलता है लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। अब जब लगातार बारिश शुरू होनें आई है तो लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि अमृतलाल और आनंदीलाल के मकान सर्वे नंबर 115 तथा बबीता बाई का मकान पट्टे की भूमि पर स्थित है। जलभराव के कारण मकानों की नींव कमजोर होती जा रही है। वर्ष 2013 में बबीता बाई का मकान भी इसी प्रकार की स्थिति में ढह चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो फिर वैसी ही दुर्घटना दोहराई जा सकती है।
बारिश के दौरान हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोगों का एक ओर से दूसरी ओर जाना भी मुश्किल हो गया है। रास्तों पर पानी भर जाने से बच्चों बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार जलभराव से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी मंडरा रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने समाधान भी सुझाया है। उनका कहना है कि सर्वे नंबर 113 की खाली भूमि में नाली का मार्ग परिवर्तित किया जाए ताकि वर्षा का पानी प्राकृतिक रूप से खेतों की ओर बह सके।
इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में विकास कार्यों की सही निगरानी नहीं हो रही। सरपंच माया बाई के कार्यों पर उनके पति मुकेश पोरवाल के प्रभाव की चर्चा भी ग्रामीणों के बीच है। वहीं ग्राम सचिव की निष्क्रियता को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि गांव के अधिकांश लोगों को यह तक पता नहीं कि सचिव कौन हैं और उनकी जिम्मेदारी क्या है।
अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या फिर समय रहते इस गंभीर समस्या का समाधान करेगा। लगातार दो से तीन माह से फरियाद कर रहे ग्रामीण अब थक चुके हैं और प्रशासन से केवल आश्वासन नहीं बल्कि तत्काल कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
जानकारी अनुसार ग्रामीणों ने कलेक्टर रतलाम और संबंधित विभागों से अपील की है कि मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तत्काल मौके का निरीक्षण कराया जाए तथा नाली और सड़क निर्माण में आवश्यक तकनीकी सुधार कराए जाएं। बारिश का दौर अभी जारी है और यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो जलभराव की यह समस्या किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
प्रशासन समय रहते संज्ञान लेकर कार्रवाई करे ताकि दर्जनों ग्रामीण परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और भविष्य में जनहानि एवं भारी आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।
रिपोर्ट : जितेंद्र कुमावत