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चीताखेड़ा। निर्जला एकादशी ग्यारस के पावन अवसर पर गुरुवार को पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। गांव के प्रमुख मंदिरों में अल सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दिनभर पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, व्रत-पूजन और धार्मिक आयोजनों का दौर चलता रहा, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। भगवान श्री विष्णु को समर्पित इस पवित्र व्रत को श्रद्धा और संयम के साथ करने से सुख, शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर भगवान को जल से भरे कलश अर्पित किए तथा विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर व्रत का पारण किया। क्षेत्र के प्रसिद्ध चारभुजा नाथ मंदिर में सुबह से देर शाम तक विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। महिला मंडलों ने भजन-कीर्तन प्रस्तुत कर भक्तिमय माहौल बनाया। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की। मंदिर के पुजारी पंडित पूरन दास बैरागी ने श्रद्धालुओं को निर्जला एकादशी का धार्मिक महत्व बताते हुए व्रत कथा का वाचन किया। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत विशेष पुण्यदायी माना जाता है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल में कुंती पुत्र भीम को अत्यधिक भूख लगने के कारण वर्षभर की सभी एकादशियों का व्रत रखना कठिन था। तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। मान्यता है कि इस एक दिन के निर्जल व्रत से वर्षभर की 24 एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इसी कारण इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |