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चीताखेड़ा । माली मौहल्ले में स्थित आशुतोष भगवान शिव के प्रांगण में माली समाज के सहयोग से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का माहौल देखने को मिला। उक्त आर्शीवचन सहज वाणी से अध्यात्म रस रसास्वादन कराने वाले कथा वाचक पंडित कुलदीप शर्मा ने श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, सदाचार और जीवन मूल्यों का संदेश देते हुए कहा कि जिस घर में कुत्ते पाले जाते हैं, उस घर का पानी भी नहीं पीना चाहिए। जहां जिस घर में कुत्ते निवास करते हैं,उस घर में श्राद्धपक्ष में पित्रों को लगाया जाने वाला भोग (तर्पण)भी स्वीकार नहीं करते हैं। कुत्तों को अगर स्नेह ही करना है तो शास्त्रों में कहा गया है उन्हें रोटी डाल सकते हैं। क्रोध, ईर्ष्या, तृष्णा और अभिमान मनुष्य के पतन के सबसे बड़े कारण हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति दूसरों के सुख में प्रसन्न रहना सीख लेता है, वही सच्चे अर्थों में सुखी जीवन जी सकता है। कथा के दौरान पं.शर्मा ने कहा कि मनुष्य को अपने मन और विचारों पर नियंत्रण रखना चाहिए। आज का मनुष्य केवल कठिन समय और दुख की घड़ी में भगवान याद करता है, जबकि ईश्वर का स्मरण हर पल होना चाहिए। कथा में उन्होंने रूप तृष्णा, रस तृष्णा और गंध तृष्णा का उल्लेख करते हुए कहा कि अत्यधिक इच्छाएं मनुष्य को भीतर से खोखला कर देती हैं। जैसे-जैसे तृष्णा बढ़ती है, वैसे-वैसे बुद्धि कमजोर होती जाती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से लोभ, मोह और अहंकार से दूर रहकर धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। पण्डित कुलदीप शर्मा ने श्रीकृष्ण-देवकी, विदुर, धृतराष्ट्र, गांधारी, युधिष्ठिर, पांडव और राजा परीक्षित, भगवान शिव -पार्वती, सुखदेव, प्रजापति दक्ष के प्रसंग सुनाते हुए कहा कि कलियुग में दान, पुण्य और सत्कर्म ही मनुष्य के सच्चे तारणहार हैं। जिस व्यक्ति के जीवन में धर्म होता है, उसके लिए कोई भी कार्य असंभव नहीं रहता। उन्होंने भारतीय संस्कृति में नमस्कार की परंपरा का महत्व बताते हुए कहा कि सत्यवादी और सदाचारी व्यक्ति का आशीर्वाद ही जीवन में फलदायी होता है। कथा के दौरान ओम् नमो भगवते वासुदेवायह्न मंत्र के जाप और श्रीकृष्ण भक्ति का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रभु भक्ति ही मनुष्य को भवसागर से पार लगाने वाली है। आनंद और शांति चाहिए तो जीवन में कृष्ण भक्ति को बनाए रखना आवश्यक है। प्रभु दर्शन, कीर्तन और सत्संग से प्रसंग सभी दुखों का नाश होता है। कथा में शिव-सती सुनाते हुए पं.शर्मा ने कहा कि जब दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव और माता सती का अपमान कर उन्हें यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया, तब माता सती ने अपमान सहन नहीं कर अग्नि में स्वयं को समर्पित कर दिया। माता सती के देह त्याग का समाचार सुन भगवान शिव का क्रोध प्रचंड हो उठा और चारों ओर हाहाकार मच गया। भगवान शिव ने रौद्र रूप धारण कर वीरभद्र को उत्पन्न किया, जिसने दक्ष प्रजापति के यज्ञ का विध्वंस कर दिया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि अहंकार और अपमान का परिणाम सदैव विनाशकारी होता है तथा मनुष्य को कभी भी अभिमान नहीं करना चाहिए। भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। *शिव - पार्वती विवाह में भूतों ने किया नृत्य*-- कथा पंडाल में शिव पार्वती विवाह की रस्म अदायगी की गई। भगवान श्री शिव जी की बारात में आए भूतों ने आज भोलेनाथ की शादी है.......भजन पर हेरत अंगेज नृत्य किया। झांकी में भगवान शिवजी (जयती माली), पार्वती जी (टिंकू माली),भूत प्रेत -पवन माली, कुलदीप माली,भोला माली, हर्षित माली, कार्तिक माली, कृष्णा माली,डूग्गू माली,भावेश माली आदि ने शानदार बाराती बने। कथा पंडाल में भजन-कीर्तन और जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। इस अवसर पर सचिव विमलेश शर्मा, जगदीश पाटीदार, उप-सरपंच रतनलाल माली सहित ने भी व्यासपीठ पर पं. शर्मा का अभिनंदन कर आशीर्वाद लिया। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |