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सुदामा के चावलों की पहली मुठ्ठी में स्वर्ग और दूसरी में पृथ्वी का वैभव सौंप दिया था श्रीकृष्ण ने – पं. कुलदीप शर्मा चीताखेड़ा। माली समाज के सामाजिक एवं धार्मिक प्रवृत्ति के घीसालाल माली पारोलिया की मुख्य यजमानी में चीताखेड़ा स्थित अतिप्राचीन शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा यज्ञ श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हो गया। कथा की पूर्णाहुति महाआरती एवं विशाल भंडारे के साथ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया। सात दिनों तक कथा वाचन करते हुए कथा मर्मज्ञ पंडित कुलदीप शर्मा ने श्रीमद्भागवत महापुराण की विभिन्न लीलाओं एवं दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में दो मित्र अवश्य बनाने चाहिए—एक भगवान श्रीकृष्ण जैसे, जो बिना युद्ध किए भी विजय सुनिश्चित कर दें, और दूसरे दानवीर कर्ण जैसे, जिन्हें हार का आभास होने के बाद भी मित्र का साथ छोड़ना स्वीकार न हो। श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग का वर्णन करते हुए पंडित शर्मा ने कहा कि सुदामा के प्रेम से अर्पित तीन मुठ्ठी चावलों में भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग का स्वाद दिखाई दिया। पहली मुठ्ठी ग्रहण कर उन्होंने सुदामा को स्वर्ग लोक का वैभव प्रदान किया और दूसरी मुठ्ठी में पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य सौंप दिया। तीसरी मुठ्ठी खाने ही वाले थे कि माता लक्ष्मी ने यह कहकर रोक दिया कि हमारे लिए भी कुछ रहने दीजिए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति ईमानदारी और सत्यनिष्ठा के साथ जीवन व्यतीत करता है, उसे मृत्यु का भय नहीं सताता। राजा परीक्षित को अपने जीवन के अंतिम समय का ज्ञान था, लेकिन आज का मनुष्य यह नहीं जानता कि उसका अंतिम क्षण कब आएगा। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को हर समय प्रभु स्मरण और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर रहना चाहिए। कथा के दौरान भगवान के विभिन्न अवतारों, भक्तों के उद्धार तथा धर्म स्थापना के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया गया। पंडित शर्मा ने बताया कि जिसने भगवान को जिस भाव से भजा, भगवान ने उसे उसी अनुरूप फल प्रदान किया। निर्मल भाव से की गई भक्ति शुभ फलदायी होती है। मुस्लिम भाइयों ने दिया सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश साप्ताहिक भागवत कथा में जीरन एवं चीताखेड़ा के मुस्लिम समाज के लोगों ने भी पूरे सात दिनों तक श्रद्धा एवं समर्पण के साथ कथा श्रवण किया। इस अवसर पर उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता, भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया। आयोजन समिति द्वारा व्यासपीठ पर उनका सम्मान भी किया गया। महाप्रसाद में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ सप्तम एवं अंतिम दिवस कथा की पूर्णाहुति यज्ञ एवं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ संपन्न हुई। इसके पश्चात विशाल महाप्रसाद (भंडारे) का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। ब्राह्मण भोजन का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम के मुख्य यजमान घीसालाल माली ने कथा वाचक पंडित कुलदीप शर्मा का शाल-श्रीफल भेंट कर सम्मान किया। वहीं व्यासपीठ पर पंडित शर्मा के परिजनों ने घीसालाल माली का सम्मान किया। इस अवसर पर आरोग्य देवी महामाया आवरी माताजी मंदिर समिति अध्यक्ष मनसुख जैन, सचिव राजेश जैन, कोषाध्यक्ष अशोक झातरिया, पत्रकार भगत मांगरिया, कारूलाल परमार एवं पंचायत सचिव अशोक जैन हरनावदा सहित अन्य गणमान्य नागरिकों ने कथा मर्मज्ञ पंडित कुलदीप शर्मा, ग्रामाचार्य पंडित टेकचंद शर्मा, यज्ञाचार्य पंडित पियूष शर्मा, उपाचार्य पंडित लोमेश शर्मा, कथा आयोजक घीसालाल माली एवं पारोलिया परिवार का शाल-श्रीफल भेंट कर सम्मान किया। साथ ही भजनों और संगीतमय प्रस्तुति से वातावरण को भक्तिमय बनाने वाले कलाकार अजय दमामी, उत्सव बारेठ, लक्की दमामी एवं नीरज दमामी का भी सम्मान किया गया। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |