रतलाम / सैलाना
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विकासखंड सैलाना के ग्राम बद्दापुरा खुर्द में पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन को लेकर प्रेरणादायी आयोजन किया गया। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के मार्गदर्शन में ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति बद्दापुरा एवं नवांकुर संस्था एकलव्य युवा जन उत्थान समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से हलमा, श्रमदान और पौधारोपण कर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का परिचय दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत ग्राम के प्राचीन कुएं पर हलमा एवं श्रमदान से हुई। ग्रामीणों ने मिलकर कुएं की साफ-सफाई कर जल स्रोतों के संरक्षण का संदेश दिया। इसके बाद उपस्थित जनों ने जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण एवं हरित वातावरण के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया।
इस अवसर पर जामफल एवं शीशम के पौधों का पौधारोपण कर गांव को हरा-भरा बनाने का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम "प्लास्टिक प्रदूषण का अंत (Beat Plastic Pollution)" पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जल स्रोतों का संरक्षण, अधिकाधिक पौधारोपण तथा प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाकर ही आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण प्रदान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पौधारोपण केवल एक दिवस का कार्यक्रम नहीं, बल्कि इसे जन-जन का सतत अभियान बनाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में जिला समन्वयक श्री रत्नेश विजयवर्गीय, समाजसेवी श्री सतीश टांक, श्री मनीष बैरागी, श्री निर्मल अमलियार, विकासखंड सैलाना के परामर्शदाता पवन पारगी, नवांकुर संस्था के सचिन , समिति अध्यक्ष बाबूलाल , विष्णु भाई वसुनिया, सचिव तोलाराम भगत, जोशी भगत, मोहन निनामा, मूलसिंह खराड़ी, राकेश भांवर, सुखराम पारगी, भाणजी भांवर (अध्यक्ष कालाखेत), तोलाराम गामड़, गोवर्धन वसुनिया, शांतिलाल खराड़ी, रामजी गामड़, नवांकुर सखियों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर सभी ने जल स्रोतों के संरक्षण, अधिकाधिक पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संकल्प लिया।
प्रकृति के प्रति जागरूकता का अनूठा उदाहरण बना बद्दापुरा खुर्द
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम ग्रामीण सहभागिता, सामाजिक समरसता और पर्यावरण के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।
हलमा और श्रमदान की परंपरा के माध्यम से गांववासियों ने यह संदेश दिया कि यदि समाज एकजुट होकर आगे बढ़े तो जल, जंगल और जमीन का संरक्षण संभव है और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित एवं समृद्ध भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत