रतलाम/सैलाना
सैलाना विधानसभा क्षेत्र में अवैध खनन के खिलाफ विधायक कमलेश्वर डोडियार ने एक बार फिर बड़ा और सख्त एक्शन लेते हुए माइनिंग माफियाओं की कमर तोड़ दी। बेड़दा-जाम्बूडिया गांव में प्लांट की वैधता समाप्त होने और पर्यावरणीय स्वीकृति (NOC) खत्म होने के बावजूद गिट्टी निकासी और ड्रिलिंग का अवैध खेल जारी था। इसकी सूचना मिलते ही विधायक डोडियार अपनी टीम के साथ अचानक मौके पर पहुंचे और माइनिंग साइट पर चल रही ड्रिलिंग मशीन को रंगे हाथों पकड़ लिया।
मौके पर मौजूद मशीन RJ 06 CA 4588 को तुरंत रुकवाया गया।
विधायक ने सख्त लहजे में कहा कि सैलाना में बिना अनुमति और बिना एनओसी के एक भी पत्थर नहीं निकलने दिया जाएगा। जनता और पर्यावरण से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
इस कार्रवाई के दौरान जिला जनपद उपाध्यक्ष केशुराम निनामा, जनपद सदस्य चंदू मईडा, भारत आदिवासी पार्टी जिला अध्यक्ष रमेश खराड़ी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने लंबे समय से चल रही अवैध खनन गतिविधियों पर नाराजगी जताते हुए विधायक की कार्रवाई का जोरदार स्वागत किया।
मौके पर रंगे हाथ पकड़े गए माफिया
विधायक कमलेश्वर डोडियार ने टीम के साथ जाम्बूडिया स्थित माइनिंग साइट का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान वहां ड्रिलिंग मशीन सक्रिय हालत में मिली। बिना वैध अनुमति और बिना पर्यावरण स्वीकृति के होल ड्रिल किए जा रहे थे ताकि अनुमति मिलते ही ब्लास्टिंग शुरू की जा सके।
विधायक ने तुरंत मशीन बंद करवाई और ऑपरेटर से लीज पर्यावरण एनओसी और अन्य दस्तावेज मांगे।
कोई भी वैध कागज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद विधायक ने मौके से ही संबंधित अधिकारियों को फोन कर तत्काल जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा:
जनता के अधिकारों और क्षेत्र के पर्यावरण की रक्षा हमारी प्राथमिकता है। नियमों को ताक पर रखकर प्राकृतिक संसाधनों की लूट करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
माइनिंग अधिकारी ने भी माना — बिना एनओसी सब अवैध
कार्रवाई के बाद जिला माइनिंग अधिकारी रीना पाठक से फोन पर चर्चा हुई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति अनिवार्य है। इसके बिना कोई गतिविधि वैध नहीं मानी जा सकती।
उन्होंने बताया कि प्लांट की वैधता समाप्त हो चुकी है और वर्तमान में चल रही गतिविधियां पूरी तरह अवैध हैं। विधायक की शिकायत पर माइनिंग इंस्पेक्टर को तत्काल मौके पर भेज दिया गया।
संचालक का कबूलनामा — परमिशन नहीं थी, फिर भी ड्रिलिंग करवाई
माइनिंग संचालक भंवर दरबार ने स्वीकार किया कि उनके पास वर्तमान में कोई वैध अनुमति नहीं थी। प्रदूषण विभाग की रिपोर्ट लंबित होने के कारण प्लांट आधिकारिक रूप से बंद था। इसके बावजूद जल्द अनुमति मिलने की उम्मीद में पहले से ड्रिलिंग शुरू करवा दी गई थी।
संचालक ने दलील दी कि 2-4 दिन में परमिशन आने वाली थी इसलिए तैयारी की गई। विधायक डोडियार ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा:
कानून उम्मीद या बहानों से नहीं चलता। बिना अनुमति कोई काम नहीं होगा।
पर्यावरण और ग्रामीणों पर मंडरा रहा था खतरा
यह पूरा क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। अवैध ड्रिलिंग और संभावित ब्लास्टिंग से आसपास के गांवों में धूल शोर और जल स्रोतों पर गंभीर असर पड़ रहा था। ग्रामीण लंबे समय से इस समस्या से परेशान थे।
विधायक की कार्रवाई के बाद ग्रामीणों में राहत और भरोसे का माहौल दिखाई दिया। लोगों ने कहा कि अब माफियाओं द्वारा प्राकृतिक संसाधनों की खुली लूट पर रोक लगनी चाहिए।
विधायक डोडियार का साफ संदेश — जीरो टॉलरेंस
कमलेश्वर डोडियार ने साफ कहा कि सैलाना क्षेत्र में अवैध खनन के खिलाफ उनकी जीरो टॉलरेंस नीति है। यह उनकी दूसरी बड़ी कार्रवाई है जिसमें उन्होंने सीधे मौके पर पहुंचकर माइनिंग माफियाओं को चुनौती दी।
उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की गहन जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए कड़ी निगरानी की मांग की।
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने की सराहना
कार्रवाई के दौरान मौजूद विधायक जिला जनपद उपाध्यक्ष केशुराम निनामा, जनपद सदस्य चंदू मईडा और भारत आदिवासी पार्टी जिला अध्यक्ष रमेश खराड़ी के कार्य को ग्रामीणों के लोगों ने के इस साहसिक कदम की सराहना की।
उन्होंने कहा कि विधायक लगातार जनता की आवाज बनकर क्षेत्र के हितों और पर्यावरण की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
जांच जारी, आगे हो सकती है बड़ी कार्रवाई
फिलहाल ड्रिलिंग मशीन जब्त कर ली गई है और विभागीय जांच जारी है। अब पूरा मामला माइनिंग विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासन की रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। यदि संचालक दोषी पाए गए तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
विधायक कमलेश्वर डोडियार की यह कार्रवाई सैलाना क्षेत्र में एक बड़ी मिसाल बनकर उभरी है। इससे स्पष्ट संदेश गया है कि यदि जनप्रतिनिधि इच्छाशक्ति दिखाएं तो माइनिंग माफियाओं के हौसले पस्त किए जा सकते हैं।
रिपोर्टर : जितेंद्र कुमावत