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मध्य प्रदेश सरकार अपने कर्मचारियों और शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही तबादला संबंधी मांग को पूरा करने के लिए तैयार है। वर्ष 2026 की तबादला नीति का प्रस्ताव पूरी तरह तैयार हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सख्त निर्देश के बाद अब 15 मई 2026 से एक महीने तक तबादलों का द्वार खुलने की संभावना है। 5 मई 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तबादला नीति में हो रही देरी पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने सामान्य प्रशासन विभाग को तुरंत नीति लाने के निर्देश दिए। CM ने कहा कि उन्होंने काफी पहले तबादला नीति बनाने को कहा था, फिर भी इसमें अनावश्यक देरी क्यों हो रही है? कई कर्मचारी और अधिकारी लंबे समय से तबादला आवेदन लेकर इंतजार कर रहे हैं। लोग उन्हें सिफारिशों के साथ प्लस-माइनस नोट के साथ भेजते हैं, लेकिन नीति न होने के कारण इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। ट्रांसफर नीति के प्रमुख प्रावधान पिछली तबादला नीति 2025 के आधार पर 2026 की नीति भी लगभग समान रूपरेखा में तैयार की गई है। इसमें स्वैच्छिक तबादलों को अलग कोटा देने के बजाय कुल निर्धारित प्रतिशत में शामिल किया जाएगा। कैडर स्ट्रेंथ के अनुसार प्रतिशत सीमा इस प्रकार होगी 200 पदों तक वाले कैडर में — 20 प्रतिशत 201 से 1000 पदों वाले कैडर में — 15 प्रतिशत 1001 से 2000 पदों वाले कैडर में — 10 प्रतिशत 2000 से अधिक पदों वाले कैडर में — 5 प्रतिशत प्रशासनिक जरूरत और स्वैच्छिक तबादलों का अनुपात 50:50 रखा जाएगा। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बैठक में जोर देकर कहा कि स्वैच्छिक तबादलों की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए क्योंकि विधायकों की सिफारिश वाले आवेदनों सहित बहुत बड़ी संख्या में आवेदन आ रहे हैं। खासकर शिक्षा विभाग में बड़े कैडर के कारण दबाव अत्यधिक है। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने भी स्वैच्छिक ट्रांसफर सीमा बढ़ाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के लिए अलग तबादला नीति तैयार की जाएगी, जिसे जल्द ही कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने स्वास्थ्य विभाग को भी इस नीति के दायरे में लाने की मांग की। जनगणना ड्यूटी वाले कर्मचारी प्रभावित नहीं होंगे नीति में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी रखा गया है कि जनगणना शाखा में तैनात कर्मचारियों और शिक्षकों का तबादला मार्च 2027 तक नहीं किया जाएगा। यह व्यवस्था जनगणना कार्य को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए की गई है। व्यापारी कल्याण बोर्ड का गठन कैबिनेट बैठक में एक और बड़ा फैसला लिया गया। राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड के गठन को मंजूरी दे दी गई। इस बोर्ड के अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव होंगे। बोर्ड में CII, FICCI, DICCI जैसे प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक संगठनों को शामिल किया जाएगा। बोर्ड की हर तीन महीने में बैठक अनिवार्य होगी और जिला स्तर पर भी समितियां गठित की जाएंगी। इस बोर्ड के माध्यम से प्रदेश के सात करोड़ से अधिक व्यापारियों को सामाजिक सुरक्षा, बेहतर व्यापारिक माहौल और समस्याओं के त्वरित समाधान की उम्मीद है। कर्मचारियों के लिए खुशी की लहर लंबे समय से तबादले का इंतजार कर रहे हजारों कर्मचारियों, शिक्षकों और अधिकारियों में इस खबर से राहत की लहर दौड़ गई है। विशेष रूप से उन कर्मचारियों में जो वर्षों से एक ही जगह पर तैनात हैं या जिनकी पारिवारिक परिस्थितियां खराब हैं, वे अब अपनी पसंद की जगह पर ट्रांसफर होने की उम्मीद कर रहे हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, नीति कैबिनेट से मंजूर होते ही ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। स्वैच्छिक तबादलों की प्राथमिकता सेवा अवधि, पारिवारिक स्थिति और कार्य प्रदर्शन के आधार पर तय की जाएगी। पृष्ठभूमि मध्य प्रदेश में हर साल तबादला नीति को लेकर काफी चर्चा रहती है। पिछले वर्षों में भी इसी तरह की नीति लागू की गई थी, लेकिन कई बार इसमें देरी होने से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ जाता था। इस बार CM मोहन यादव की सख्ती से प्रक्रिया तेज हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि transparent और समयबद्ध तबादला नीति न सिर्फ कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाएगी बल्कि प्रशासनिक दक्षता में भी सुधार लाएगी। नोट: अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद विस्तृत दिशा-निर्देश और ऑनलाइन आवेदन की तारीख की घोषणा की जाएगी। कर्मचारियों को सलाह दी जाती है कि आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित अपडेट चेक करते रहें। |