रतलाम
ग्राम बंजली सैलाना रोड पर सरकारी भूमि (सर्वे नंबर 44) पर बनी अवैध हजरत मस्ताना शाह बाबा दरगाह (एरोड्रम वाले बाबा) का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। जनसुनवाई में नरेन्द्र उर्फ बंटी शर्मा द्वारा दिए गए तगड़े आवेदन (जनवेदन पंजी क्रमांक 50163) के मात्र 24 घंटे के अंदर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए 6 मई 2026 को प्रस्तावित उर्स और कव्वाली कार्यक्रम को पूरी तरह रद्द कर दिया।
उर्स की अनुमति नहीं दी गई!
यह स्थानीय प्रशासन की बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार बंटी शर्मा के RTI दस्तावेजों और लिखित शिकायत के आधार पर SDM शहर एवं जिला प्रशासन ने कार्यक्रम को अनुमति देने से इनकार कर दिया। कल 6 मई को जोर-शोर से हो रही तैयारियां अचानक थम गईं और कार्यक्रम स्थगित/रद्द कर दिया गया।
बंटी शर्मा की जीत, अवैध कब्जे वालों को पहला बड़ा झटका
नरेन्द्र शर्मा ने कहा, यह सिर्फ शुरुआत है। सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा अब ज्यादा दिनों तक नहीं टिकेगा। RTI में साफ है कि 1956-57 से लेकर 2025-26 तक यह भूमि शासकीय नाकाबिल बरडी (चरनोई) दर्ज है। फिर भी कुछ लोग यहां मजार बनाकर उर्स-कव्वाली चला रहे थे।
ग्राम पंचायत बंजली ने स्पष्ट लिखा था – यह राजस्व विभाग की भूमि है, ग्राम पंचायत में कोई दरगाह-मजार नहीं है। तहसीलदार रतलाम ने भी 22 जनवरी 2026 को पुष्टि की कि कोई डायवर्सन, कोई अनुमति या कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
अब मांग तेज: पूरी दरगाह हटाओ!
उर्स रद्द होने के बाद अब स्थानीय लोगों और बंटी शर्मा का जोर इस बात पर है कि केवल कार्यक्रम रोकना नहीं, पूरी अवैध दरगाह और मजार को हटाकर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
बंटी शर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा है – अगर प्रशासन ने जल्दी कार्रवाई नहीं की तो आगे कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। यह सरकारी भूमि है, इसे हड़पने नहीं दिया जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कई स्थानीय लोगों ने बंटी शर्मा की सराहना की है। उनका कहना है कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर धार्मिक स्थल बनाने और फिर उर्स-कव्वाली के नाम पर आमजन को भ्रमित करने का सिलसिला बंद होना चाहिए।
गुरुवार को होने वाले टोने-टोटके और झाड़-फूंक का कार्यक्रम भी अब विवादों के घेरे में आ गया है।
इलाके के युवाओं का कहना है – पहले विकास कार्यों में बाधा, अब भ्रम फैलाने का काम। पूरी मजार हटनी चाहिए।
प्रशासन पर अब दबाव बढ़ा
जिलाधिकारी रतलाम, SDM शहर और पुलिस प्रशासन अब इस मामले पर नजर रखे हुए हैं। सूत्र बता रहे हैं कि जल्द ही अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए टीम गठित की जा सकती है।
बड़ी सवाल यह है:
क्या जिला प्रशासन अब पूरी दरगाह हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा?
अतिक्रमण करने वालों और उन्हें संरक्षण देने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?
क्या यह मामला सिर्फ उर्स रद्द करने तक सीमित रहेगा या असली दोषियों तक पहुंचेगा?
रतलाम जिले के इतिहास में यह पहला मौका है जब RTI दस्तावेजों और जनसुनवाई के जरिए सरकारी भूमि पर बने अवैध धार्मिक अतिक्रमण को इतनी तेजी से रोका गया।
नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध दस्तावेज, RTI जवाब, खसरा रिकॉर्ड और 6 मई को उर्स रद्द होने की अपडेट के आधार पर तैयार की गई है। आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर रखी जा रही है।
रिपोर्टर - जितेंद्र कुमावत