रतलाम / बाजना
बाजना नगर आज उस समय भक्ति और आस्था के रंग में रंग गया, जब परम पूज्य आचार्य भगवंत श्री ऋषभ विजय जी महाराज साहब की आज्ञा का पालन करते हुए उनके तपस्वी शिष्य परम पूज्य पीयूष विजय जी महाराज साहब का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। नगर में प्रवेश के साथ ही श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिला और पूरा वातावरण जयकारों से गूंज उठा।
पीयूष विजय जी महाराज साहब वर्तमान में अपने सतत आठवें वर्षीतप की कठिन आराधना में लीन हैं। उन्होंने मोहनखेड़ा से उग्र विहार प्रारंभ कर राजस्थान के प्रसिद्ध रणकपुर तीर्थ की ओर प्रस्थान किया है, जहां वे नव दिवसीय तप आराधना करेंगे। उनके इस कठोर तप और संयमपूर्ण जीवन से श्रद्धालु गहराई से प्रेरित हो रहे हैं।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए महाराज साहब ने कहा कि “गुरु के माध्यम से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है, चाहे वह गुरु माता-पिता के रूप में ही क्यों न हों।” उन्होंने श्रद्धालुओं को सच्ची श्रद्धा, समर्पण और विश्वास के साथ आराधना करने का संदेश दिया। उनके प्रवचन ने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
दोपहर 12:20 बजे महाराज श्री के मुखारविंद से महा मंगलिक का श्रवण कराया गया, जिसका लाभ सकल श्रीसंघ ने प्राप्त किया। इस अवसर पर प्रभावना का लाभ विनोद कुमार पारस पालरेचा परिवार द्वारा लिया गया।
धर्मसभा में संघ अध्यक्ष संदीप नाहर, विमल कोठारी, सतीश नाहर, मुकेश चोरडिया, दीपक कोठारी, केसरीमल पालरेचा, रतन चोरडिया, महिपाल कोठारी, जैनेंद्र चौरडिया सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
बाजना में हुए इस मंगल प्रवेश ने न केवल धार्मिक वातावरण को प्रगाढ़ किया, बल्कि पूरे नगर को भक्ति, तप और आध्यात्मिकता की एक नई ऊर्जा से भी भर दिया।
रिपोर्ट - ईश्वर टांक ( बाजना)
(क्राइम) रिपोर्टर - जितेंद्र कुमावत