रतलाम /आलोट/उज्जैन
सनसनीखेज हत्याकांड! रतलाम जिले के आलोट के विक्रमगढ़ का एक निहत्था मजदूर युवक महज एक लड़की की इज्जत बचाने की सजा में मौत के घाट उतार दिया गया। शुक्रवार रात 10:30 बजे बाजार जाने की बात कहकर घर से निकला 22 वर्षीय मनीष माली कभी वापस नहीं लौटा। मात्र 19 घंटे बाद उसका शव उज्जैन के हाटकेश्वर विहार/कॉलोनी स्थित एक बंद कमरे में बरामद हुआ। गला रस्सी से घोंटा गया था।
पूरा खौफनाक किस्सा
मनीष माली पिता दिनेश माली, वार्ड-14 विक्रमगढ़ निवासी। पिता के साथ कृषि मंडी में हम्माली का काम करता था। शुक्रवार शाम पिता-पुत्र साथ काम करके घर पहुंचे थे। रात को मनीष अकेला निकला और गायब।
परिजनों ने आलोट थाने में शिकायत दर्ज कराई कि मयंक उर्फ महेंद्र माली और उसके साथी आए, मारपीट की और सफेद कार में जबरन ठूंसकर ले गए। पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया।
मुख्य आरोपी मयंक ने पूछताछ में खुलासा किया — डेढ़ साल पहले एक शादी समारोह में मनीष ने एक लड़की को तंग करने से रोका था। उसी बात को लेकर रंजिश पाल रखी थी। प्रेम प्रसंग/छेड़छाड़ की रंजिश को लेकर उसने ठंडे दिमाग से खूनी साजिश रची।
मयंक व उसके साथियों ने मनीष को उज्जैन ले जाकर निर्मम तरीके से रस्सी से गला घोंट दिया। शव को मयंक के ही परिवार के घर (जो करीब 2 साल पहले बना था) में डालकर ताला लगा दिया। आरोपी आलोट लौट आए और जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई
आलोट पुलिस ने मुख्य आरोपी मयंक उर्फ महेंद्र माली सहित रितेश माली, निखिल, यश, मुजफ्फर (कुल 5 आरोपियों) को हिरासत में ले लिया। उज्जैन के नीलगंगा थाना क्षेत्र से शव बरामद किया गया। रविवार सुबह पोस्टमॉर्टम कराया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात — एक आरोपी यश माली के पिता प्रकाश माली प्रैक्टिशनर डॉक्टर हैं, जिन पर पहले भी हत्या का आरोप लग चुका है। अपराध की गंध पूरे परिवार में लगती है।
आगबबूला भीड़ का बवाल
जैसे ही हत्या की खबर फैली, विक्रमगढ़ और आलोट में आक्रोश की लहर दौड़ गई। सैकड़ों की भीड़ आलोट थाने पर जुट गई। भीड़ ने थाने का गेट तोड़ने की कोशिश की, पत्थर फेंके और आरोपियों को जिंदा जलाने की नारेबाजी की।
थाने के अंदर घुसने की कोशिश, मुख्य रोड पर चक्काजाम, आरोपियों का जुलूस निकालने और उनके घर तोड़ने की मांग की गई। एसडीओपी पल्लवी गौर, जावरा एसडीओपी संदीप मालवीय और अन्य अधिकारियों को घंटों समझाइश देनी पड़ी। कांग्रेस नेता वीरेंद्र सिंह सोलंकी भी मौके पर पहुंचे। रात 8:30 बजे बाद कहीं मामला शांत हुआ।
परिजनों का कहना है — "मनीष ने तो बस एक लड़की की इज्जत बचाई थी... बदले में उसे मौत मिल गई। ये न्याय कहां है?"
समाज में सवाल
यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सोची-समझी क्रूरता, बदले की भावना और युवाओं में बढ़ती असहिष्णुता का जीता-जागता उदाहरण है। छोटी-सी बात पर खून खराबा करना कितना खतरनाक हो सकता है, इस घटना ने फिर साबित कर दिया।
पुलिस अब पूरे मामले की गहन जांच में जुटी है। सभी आरोपियों पर बीएनएस की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
अपडेट: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद और खुलासे हो सकते हैं। पूरा इलाका इस घटना से सदमे में है।
क्राइम रिपोर्टर जितेंद्र कुमावत