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मध्य-पूर्व में जारी ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचा तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर भी गहरा पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार दोनों देशों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई का दौर जारी है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि इस संघर्ष में अन्य बड़े देश भी शामिल होते हैं तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। हालांकि अभी तीसरे विश्व युद्ध जैसी स्थिति नहीं बनी है, लेकिन वैश्विक स्तर पर चिंता जरूर बढ़ गई है। इस युद्ध का सबसे बड़ा असर तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। मध्य-पूर्व दुनिया के तेल उत्पादन का महत्वपूर्ण क्षेत्र है और यहां किसी भी तरह के सैन्य संघर्ष से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा रहता है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है। यदि यहां से तेल की आपूर्ति बाधित होती है तो वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेजी आ सकती है। वर्तमान में भारत के बड़े शहरों में पेट्रोल की कीमत लगभग 95 रुपये से 105 रुपये प्रति लीटर के बीच बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा चलता है और तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है तो आने वाले समय में पेट्रोल के दामों में 5 से 15 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी संभव है। हालांकि भारत सरकार और तेल कंपनियां फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने से आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों पर असर पड़ सकता है। कुल मिलाकर ईरान-अमेरिका तनाव केवल सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। |