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ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव अब और अधिक बढ़ता नजर आ रहा है। सैन्य गतिविधियों के साथ-साथ दोनों देशों के बीच जुबानी हमले भी तेज हो गए हैं। बढ़ते तनाव के बीच ईरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ी चेतावनी दी है। समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक अधिकारी ने कहा कि ट्रंप को सतर्क रहने की जरूरत है, अन्यथा हालात उनके लिए भी गंभीर हो सकते हैं। यह चेतावनी ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के ठिकानों पर हमलों तथा तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान की ओर से साफ कहा गया है कि यदि अमेरिका हमले जारी रखता है तो उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि ईरान के खिलाफ युद्ध अल्पकालिक हो सकता है, लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि ईरान वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित करने की कोशिश करता है तो संघर्ष और तेज हो सकता है। मियामी के पास अपने गोल्फ क्लब में रिपब्लिकन सांसदों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि पश्चिम एशिया में कुछ समय के लिए कार्रवाई की गई है और उन्हें उम्मीद है कि स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी। हालांकि, कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर चेतावनी दी कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति को रोकने की कोशिश करता है तो अमेरिका पहले से कहीं अधिक सख्त सैन्य कार्रवाई करेगा। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ बातचीत के अनुभव को कड़वा बताते हुए कहा कि फिलहाल नई कूटनीतिक वार्ता की संभावना नजर नहीं आती। उन्होंने एक साक्षात्कार में अमेरिका पर विश्वासघात और सैन्य आक्रामकता के आरोप लगाए। अराघची ने कहा कि ईरान ने पिछले वर्ष जून में अच्छे इरादे से अमेरिका के साथ बातचीत शुरू की थी, लेकिन वार्ता के दौरान ही उस पर हमला कर दिया गया। उनका दावा है कि इस वर्ष भी अमेरिका ने हमले न करने का भरोसा दिया था और परमाणु मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान खोजने की बात कही थी, लेकिन हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ गए। उन्होंने फारस की खाड़ी के देशों को संबोधित करते हुए कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान द्वारा किए गए हमले आत्मरक्षा के अधिकार के तहत हैं। उनका कहना था कि यदि अन्य देश अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठा सकते हैं तो ईरान को भी अपने नागरिकों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यह युद्ध ईरान ने नहीं चुना, बल्कि उस पर थोपा गया है और देश केवल अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई कर रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने तक ईरान मिसाइल हमले जारी रखने के लिए तैयार है और देश की जनता की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। |