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नीमच। महिला ही परिवार की धुरी है और उसी के कारण परिवार का अस्तित्व कायम रहता है। घर को संभालने वाली महिला दुनिया की सबसे श्रेष्ठ मैनेजर होती है, इसलिए वह सर्वोच्च सम्मान और अभिनंदन की अधिकारी है। हमारे वेदों में नारी का सम्मान उसे घर की साम्राज्ञी की उपाधि देकर किया गया है। 24 घंटे बिना अवकाश और बिना वेतन के कार्य करने वाली यदि कोई है तो वह घर संभालने वाली महिला ही है। दुनिया में उससे बढ़कर संवेदनशील और कुशल मनोवैज्ञानिक भी शायद ही कोई हो सकता है। यह विचार वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. संजय जोशी ने तेरापंथ महिला मंडल जैन समाज नीमच द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित गृह लक्ष्मी स्वाभिमान विषयक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में पारिवारिक व्यवस्था तेजी से कमजोर होती जा रही है। पाश्चात्य देशों में तो अब घरों में रसोईघर तक समाप्त होते जा रहे हैं। महिला के बिना रसोईघर की कल्पना भी संभव नहीं है। ऐसे समय में आवश्यकता इस बात की है कि हमारे घरों में रसोईघर और पारिवारिक संस्कार सुरक्षित बने रहें, क्योंकि रसोईघर ही परिवार का प्रमुख केन्द्र होता है। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण एवं प्रेरक गीत से हुई। तेरापंथ महिला मंडल नीमच की अध्यक्ष ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि जैन समाज स्वयं को सौभाग्यशाली मानता है कि आज भी यहां संयुक्त परिवारों की परंपरा बड़ी संख्या में कायम है और महिलाएं गृह लक्ष्मी के रूप में घर-परिवार की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला कांग्रेस कमेटी की पदाधिकारी आशा सांभर उपस्थित रहीं। उन्होंने इस अवसर पर महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही महत्वपूर्ण योजनाओं तथा संविधान में महिलाओं को दिए गए अधिकारों और प्रावधानों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर तेरापंथ जैन समाज के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वी.के. जैन ने अतिथियों का परिचय कराया तथा कार्यक्रम की थीम और उसके महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में तेरापंथ जैन समाज की महिलाओं द्वारा कविता पाठ भी किया गया। इस दौरान श्रीमती स्वाति भंसाली, श्रीमती रूपाली भंसाली एवं श्रीमती बीकाजी भंसाली ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन तेरापंथ महिला मंडल की सचिव प्रज्ञा बैल ने किया। |