रतलाम
रावटी थाना क्षेत्र के ग्राम उमर बट्टा में माता के नाम की जमीन के बंटवारे को लेकर हुए विवाद में सगे भाई, भतीजे और चचेरे भाई द्वारा की गई हत्या के मामले में न्यायालय ने कड़ा फैसला सुनाया है। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश रतलाम राजेश नामदेव की अदालत ने तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास और 15-15 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
प्रकरण में अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने बताया कि 21 मई 2025 की रात फरियादी रामचंद्र गरवाल अपनी पत्नी ऐता बाई के साथ घर के बाहर सो रहे थे। इसी दौरान रात करीब 11:30 बजे पुरानी रंजिश के चलते गोबा, उसका पुत्र राजू और तेलिया लाठियां लेकर रामचंद्र के घर पहुंचे और जान से मारने की नीयत से उन पर हमला कर दिया। आरोपियों ने रामचंद्र पर ताबड़तोड़ लाठियों से वार किए, जिससे उनके सिर, दोनों हाथों और पीठ पर गंभीर चोटें आईं। बीच-बचाव करने आई उनकी पत्नी ऐता बाई को भी सिर, गर्दन और पीठ पर चोटें लगीं।
रामचंद्र की चीख-पुकार सुनकर उनका छोटा भाई पेमा और जमाई राजेश मौके पर पहुंचे, जिसके बाद तीनों आरोपी वहां से भाग गए।
घायल रामचंद्र और ऐता बाई को पहले रावटी अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें मेडिकल कॉलेज रतलाम रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान रामचंद्र की मौत हो गई।
मामले में प्रधान आरक्षक आतिश धानक ने रामचंद्र की रिपोर्ट दर्ज की थी और उनका वीडियो भी बनाया था। न्यायालय ने इस वीडियो को रामचंद्र का मृत्युकालीन कथन माना। पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों ने रामचंद्र के शरीर पर 16 चोटें पाई।
पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त लाठियां और खून से सने कपड़े जब्त किए। एफएसएल जांच में आरोपियों से जब्त सामग्री और मृतक के कपड़ों में समान डीएनए पाया गया।
मामले को सनसनीखेज मानते हुए पुलिस ने तेजी से जांच पूरी की। न्यायालय में अभियोजन पक्ष ने 11 गवाह, 68 दस्तावेज और 33 आर्टिकल पेश किए, जिसके आधार पर अदालत ने छह माह के भीतर फैसला सुनाते हुए तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया।
Crime reporter Jitendra Kumawat