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नीमच । कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा ने बुधवार को जावद स्थित सांदीपनि विद्यालय में विद्यार्थियों के साथ संवाद सत्र आयोजित कर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा परीक्षा की तैयारी, तनाव प्रबंधन, समय प्रबंधन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और करियर चयन के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया। संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने पढ़ाई में आने वाली चुनौतियों, छूटे हुए पाठ्यक्रम को पूरा करने, परीक्षा के तनाव से निपटने और पढ़ाई के साथ कौशल विकास जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे। समय प्रबंधन और नियमित अध्ययन से दूर होगा परीक्षा का तनाव विद्यार्थियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कलेक्टर श्री चंद्रा ने कहा कि परीक्षा के तनाव से बचने के लिए आवश्यक है कि विद्यार्थी निर्धारित समय से पहले अपना पाठ्यक्रम पूर्ण कर लें। परीक्षा से कम से कम 15 से 20 दिन पूर्व पाठ्यक्रम पूरा करने का लक्ष्य रखें, ताकि अंतिम दिनों में पुनरावृत्ति एवं प्रश्नों के अभ्यास पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। उन्होंने नियमित अध्ययन और साप्ताहिक पुनरावृत्ति को सफलता के लिए आवश्यक बताया। समय प्रबंधन के संबंध में उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को विद्यालय में बिताए जाने वाले समय के अतिरिक्त घर पर भी अध्ययन के लिए निश्चित समय निर्धारित करना चाहिए। सभी के पास समय समान होता है, लेकिन उस समय का नियोजन और सदुपयोग ही सफलता का आधार बनता है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी दिनचर्या के अनुरूप अध्ययन की समय-सारणी तैयार करने की सलाह दी। छूटे हुए पाठ्यक्रम को योजनाबद्ध तरीके से करें पूर्ण पाठ्यक्रम के छूटे हुए अध्यायों को लेकर पूछे गए प्रश्न पर कलेक्टर ने सुझाव दिया कि विद्यार्थी वर्तमान में विद्यालय में संचालित पाठ्यक्रम का अध्ययन नियमित रूप से जारी रखें। इसके साथ ही छूटे हुए सरल अध्यायों को प्राथमिकता से पूरा करते हुए अधिकतम पाठ्यक्रम को कवर करने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखना आवश्यक है तथा किसी भी विषय को अंतिम समय के लिए नहीं छोड़ना चाहिए। कक्षा 9वीं से ही निर्धारित करें करियर का लक्ष्य करियर एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के संबंध में कलेक्टर ने कहा कि विद्यार्थियों को कक्षा 9वीं से ही अपने भविष्य के प्रति सजग होकर लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। आईआईटी में प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थी कक्षा 10वीं के बाद से ही जेईई की योजनाबद्ध तैयारी प्रारंभ करें। इसी प्रकार नीट एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी विषयों की मूल अवधारणाओं को समझते हुए मजबूत आधार तैयार करें। उन्होंने विद्यार्थियों को शॉर्टकट के बजाय नियमित अध्ययन और विषयों की गहन समझ विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी डॉक्टर, इंजीनियर, खेल, संगीत, व्यवसाय अथवा अपनी रुचि के किसी अन्य क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित कर उसी दिशा में निरंतर मेहनत करें। पढ़ाई के साथ-साथ अपनी रुचि के क्षेत्र में कौशल विकास पर भी ध्यान दें। इंटरनेट और एआई का करें सकारात्मक उपयोग कलेक्टर श्री चंद्रा ने विद्यार्थियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, एक्स आदि पर अनावश्यक समय व्यतीत करने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग विद्यार्थियों को वास्तविक लक्ष्यों से भटका सकता है। इसलिए इंटरनेट का उपयोग पढ़ाई, ज्ञानवर्धन और कौशल विकास के लिए सकारात्मक रूप से किया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यालय में पढ़ाए जा रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं कोडिंग जैसे विषयों को गंभीरता से सीखने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया तथा कहा कि आधुनिक तकनीक का ज्ञान भविष्य में उनके लिए उपयोगी साबित होगा। ग्रामीण परिवेश की चुनौतियों के बीच समय का बेहतर नियोजन करें कलेक्टर ने ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जो विद्यार्थी विद्यालय के साथ घर एवं कृषि कार्यों में भी सहयोग करते हैं,वे अपनी परिस्थितियों के अनुरूप दिनचर्या निर्धारित कर नियमित रूप से अध्ययन के लिए समय निकालें। परिस्थितियों को बाधा मानने के बजाय उनका सामना करते हुए अपने लक्ष्य की दिशा में निरंतर प्रयास करें।उन्होंने कहा कि अनुशासन, आत्मविश्वास,नियमित अध्ययन और समयबद्ध तैयारी से सफलता प्राप्त की जा सकती है। शिक्षकों एवं प्राचार्य को दिए आवश्यक निर्देश संवाद सत्र के उपरांत कलेक्टर श्री चंद्रा ने विद्यालय के प्राचार्य एवं शिक्षकों को निर्देश दिए कि जिन विद्यार्थियों को पढ़ाई में कठिनाई आ रही है अथवा अतिरिक्त मार्गदर्शन की आवश्यकता है,उनकी शैक्षणिक कमजोरियों को चिह्नित कर व्यक्तिगत रूप से सहयोग प्रदान करें। अर्धवार्षिक परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद प्रत्येक कक्षा में अनिवार्य रूप से अभिभावक-शिक्षक बैठक आयोजित की जाए तथा अभिभावकों को उनके बच्चों की शैक्षणिक स्थिति, कमजोरियों और सुधार की संभावनाओं से अवगत कराया जाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में सुधार के लिए शिक्षक एवं अभिभावक समन्वित रूप से प्रयास करें। विद्यार्थियों की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए तथा आवश्यकता के अनुसार उन्हें अतिरिक्त कक्षाओं एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इस अवसर पर जावद एसडीएम श्री संजीव साहू, जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती ऐश्वर्या मुंद्रा, विद्यालय प्राचार्य श्री बी.एल. कुमावत सहित शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे। |