रतलाम/सैलाना (सकरावदा)। शारदीय नवरात्रि के समापन पर ग्राम सकरावदा में आस्था, परंपरा और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। नौ दिनों तक मां शक्ति की आराधना के बाद लालबाई माताजी एवं भैंसासरी माताजी मंदिर परिसर में स्थापित ज्वारों का बाड़ी सहित विधि-विधान से विसर्जन किया गया। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की गूंज, माता के जयकारों और श्रद्धालुओं की सहभागिता से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। विसर्जन कार्यक्रम में सकरावदा सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
ग्रामीण परंपरा के अनुसार शारदीय नवरात्रि की एकम तिथि पर लालबाई माताजी एवं भैंसासरी माताजी मंदिर परिसर में ज्वारे बोए गए थे। नवरात्रि के नौ दिनों तक इनकी नियमित देखभाल के साथ पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने मां शक्ति के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए परिवार, गांव और क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। नवरात्रि के समापन पर महाआरती और पूजन के बाद गाजे-बाजे के साथ ज्वारा विसर्जन की परंपरा निभाई गई।
ढोल-नगाड़ों के साथ निकली विसर्जन यात्रा
विसर्जन के अवसर पर मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद ज्वारों को बाड़ी सहित लेकर विसर्जन यात्रा निकाली गई। ढोल-नगाड़ों की थाप और माता के जयकारों के बीच श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ शामिल हुए। आयोजन में ग्रामीणों, विशेषकर आदिवासी समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुए इस आयोजन ने ग्रामीण संस्कृति और धार्मिक आस्था की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की।
ज्वारों की वृद्धि से फसल का अनुमान लगाने की परंपरा
ग्रामीण अंचल में ज्वारा बोने और विसर्जन की परंपरा का धार्मिक महत्व होने के साथ कृषि संस्कृति से भी गहरा जुड़ाव है। मान्यता के अनुसार नवरात्रि के दौरान ज्वारों की वृद्धि, हरियाली और उनकी स्थिति देखकर किसान आने वाली रबी की फसल, विशेषकर गेहूं की पैदावार तथा संभावित रोगों के संबंध में पारंपरिक अनुमान लगाते हैं। हालांकि, यह स्थानीय लोकमान्यता है, वैज्ञानिक कृषि पूर्वानुमान का विकल्प नहीं।
सकरावदा में ज्वारा विसर्जन का यह आयोजन मां शक्ति के प्रति अटूट श्रद्धा के साथ ग्रामीण परंपराओं के संरक्षण का प्रतीक बना। नौ दिनों तक चली आराधना के समापन पर श्रद्धालुओं ने माता से क्षेत्र में सुख-शांति, अच्छी फसल, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। धार्मिक उल्लास के बीच संपन्न हुए इस आयोजन ने एक बार फिर ग्रामीण समाज की सांस्कृतिक एकजुटता और परंपराओं के प्रति उसकी गहरी आस्था को दर्शाया।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत