रतलाम /सैलाना। नगर में पेयजल व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया पर सामने आई फोटो ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फोटो में नगर परिषद के टैंकर से एक निजी टैंकर में पानी भरे जाने का दृश्य नजर आ रहा है। फोटो सामने आने के बाद नगर में सरकारी टैंकर के उपयोग और पानी की सप्लाय व्यवस्था को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बताया जा रहा है कि नगर परिषद के टैंकर से निजी टैंकर में पानी सप्लाय किया जा रहा है और इसके बाद इसी पानी को ‘मीठे पानी’ के नाम पर लोगों को बेचे जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि पानी की बिक्री और पूरे मामले की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल फोटो ने नगर परिषद की जल व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर परिषद के सरकारी टैंकर से निजी टैंकर में पानी भरने की अनुमति किसके निर्देश पर दी गई? क्या निजी टैंकर में पानी भरने के लिए नगर परिषद द्वारा कोई अधिकृत अनुमति जारी की गई है? यदि अनुमति दी गई है तो उसके नियम और शर्तें क्या हैं?
यदि नगर परिषद का टैंकर आम नागरिकों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए उपयोग किया जा रहा है, तो फिर निजी टैंकर में पानी भरने की व्यवस्था किस उद्देश्य से की जा रही है, इसकी जांच होना जरूरी है। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि निजी टैंकर के माध्यम से पानी की बिक्री की जा रही है या नहीं और यदि की जा रही है तो उसके लिए किसी प्रकार की अनुमति ली गई है या नहीं।
मामले में नगर परिषद के टैंकर की लॉगबुक, पानी भरने का रिकॉर्ड, संबंधित कर्मचारियों की भूमिका और निजी टैंकर संचालक से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए। वायरल फोटो की तारीख, स्थान और परिस्थितियों की भी पुष्टि की जाए तो पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकती है।
अब सवाल यह है कि क्या सोशल मीडिया पर वायरल फोटो में दिखाई दे रही तस्वीर के पीछे वास्तव में पानी की निजी बिक्री का मामला है या इसके पीछे कोई अधिकृत व्यवस्था है? इसका जवाब नगर परिषद की जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही सामने आएगा।
फिलहाल वायरल फोटो ने सैलाना की जल व्यवस्था और सरकारी संसाधनों के उपयोग को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। प्रशासन को मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच करनी चाहिए, ताकि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारी तय की जा सके।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत