सैलाना/रतलाम। सैलाना के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले श्री रामद्वारा की भूमि को कथित अतिक्रमण और अवैध कब्जों से मुक्त कराने की मांग को लेकर चल रही लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। एक ओर रामद्वारा बचाओ समिति की लगातार शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री जनसंवाद में मामला उठने पर कलेक्टर ने सैलाना तहसीलदार को 7 कार्यदिवस में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर इसी विवाद में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने 5 अक्टूबर को महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए फिलहाल किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ या निर्माण हटाने की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट के आदेश ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि संबंधित पक्ष को अपना जवाब रखने का पूरा अवसर दिया जाना जरूरी है। अब इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो गई है।
रामद्वारा बचाओ समिति ने उठाई थी आवाज
सैलाना नगर के समस्त नगर वासियों रामद्वारा बचाओ समिति, सैलाना का कहना है कि रामद्वारा की बहुमूल्य धार्मिक भूमि पर कथित रूप से लंबे समय से कब्जे, अवैध निर्माण एवं दुकानों का मामला सामने आता रहा है। समिति ने रामद्वारा की पवित्र भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने तथा धार्मिक स्थल की गरिमा बनाए रखने के लिए लगातार प्रशासन के सामने शिकायतें रखीं।
समिति द्वारा 10 जुलाई 2026 को तत्कालीन कलेक्टर को शिकायत दी गई थी। इसके बाद सैलाना एसडीएम को जांच के निर्देश दिए गए और 30 जुलाई को पंचनामा तैयार किया गया। समिति का आरोप है कि इसके बावजूद मामले में अपेक्षित कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
जनसुनवाई में जानकारी नहीं मिली तो मुख्यमंत्री जनसंवाद में पहुंचा मामला
15 सितंबर 2026 की जनसुनवाई में समिति ने जांच की प्रगति और पंचनामे की प्रति की जानकारी मांगी। समिति के अनुसार, उसे जानकारी नहीं दी गई और मामला कलेक्टर कार्यालय से संबंधित बताया गया। इसके बाद समिति ने मामले को मुख्यमंत्री जनसंवाद में उठाते हुए रामद्वारा की भूमि की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच तथा कथित अतिक्रमण पर कार्रवाई की मांग की।
इस शिकायत पर कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सैलाना तहसीलदार को आवश्यक कार्रवाई करने और 7 कार्यदिवस में अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। इससे समिति और क्षेत्र के लोगों में उम्मीद जगी कि रामद्वारा की भूमि को लेकर वर्षों से उठ रहे सवालों पर अब जमीनी कार्रवाई होगी।
लेकिन इसी बीच हाईकोर्ट पहुंचा मामला
इसी विवाद में श्री रामविलासजी गुरु निर्मलरामजी एवं अन्य बनाम मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य मामले में रिट याचिका क्रमांक 41608/2026 पर 5 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ में सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ताओं ने सर्वे नंबर 603 की 0.09 हेक्टेयर भूमि पर बने निर्माणों को हटाने की कार्रवाई का विरोध किया। उनका कहना था कि उन्हें तत्कालीन स्वामी द्वारा 27 अक्टूबर 1965 की वसीयत के आधार पर दुकानों, स्कूल और अन्य निर्माणों का कब्जा प्राप्त हुआ था।
हाईकोर्ट ने प्रशासन की कार्रवाई पर उठाया सवाल
न्यायमूर्ति पवन कुमार द्विवेदी की पीठ ने आदेश में कहा कि जब संबंधित पक्ष को 1 अक्टूबर को अपना स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया गया था, उससे पहले ही निर्माण हटाने के लिए टीम गठित कर देना प्रथम दृष्टया यह दर्शाता है कि प्राधिकरण ने जवाब आने से पहले ही निर्माण हटाने का मन बना लिया था।
हालांकि हाईकोर्ट ने वसीयत के आधार पर किए जा रहे स्वामित्व के दावे पर अंतिम निर्णय नहीं दिया और कहा कि ऐसे विवादित तथ्य साक्ष्यों के आधार पर सक्षम मंच पर तय किए जाने हैं।
अब सबसे अहम—तोड़फोड़ पर फिलहाल पूरी रोक
हाईकोर्ट ने संबंधित पक्ष को 10 दिनों के भीतर नोटिस का जवाब प्रस्तुत करने की अनुमति दी है। इसके बाद संबंधित अधिकारी को जवाब पर विचार कर चार सप्ताह के भीतर उचित आदेश पारित करना होगा।
सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह है कि जवाब पर निर्णय होने तक कोई तोड़फोड़ अथवा निर्माण हटाने की कार्रवाई नहीं की जाएगी। यदि संबंधित पक्ष के विरुद्ध आदेश आता है तो उसे उसके खिलाफ कानूनी उपचार लेने के लिए 10 दिन का समय भी देना होगा।
रामद्वारा बचाओ समिति के संघर्ष से अब मामला निर्णायक दौर में
रामद्वारा बचाओ समिति का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि रामद्वारा की धार्मिक भूमि की पवित्रता, संरक्षण और कथित अतिक्रमण से मुक्ति सुनिश्चित करना है। समिति लंबे समय से प्रशासनिक स्तर पर दस्तावेजों और शिकायतों के साथ कार्रवाई की मांग करती रही है।
अब एक तरफ कलेक्टर के 7 कार्यदिवस में अतिक्रमण हटाने के निर्देश हैं और दूसरी तरफ हाईकोर्ट का आदेश है कि संबंधित पक्ष का जवाब लिए बिना फिलहाल कोई तोड़फोड़ नहीं होगी। ऐसे में मामला अब केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दस्तावेज, वसीयत, भूमि के अधिकार, कथित निर्माण और रामद्वारा की धार्मिक संपत्ति की स्थिति की पूरी जांच के केंद्र में आ गया है।
सैलाना में अब सबसे बड़ा सवाल यही है—रामद्वारा की पवित्र भूमि से जुड़े वर्षों पुराने विवाद का प्रशासन दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर आखिर क्या निष्कर्ष निकालता है? समिति की नजर अब प्रशासनिक जांच और आगामी आदेश पर है। वहीं क्षेत्रवासियों की उम्मीद है कि रामद्वारा की धार्मिक पहचान और भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हुए निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनसम्मत कार्रवाई होगी।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत