रतलाम / सैलाना । श्राद्ध पक्ष से पहले दान-पुण्य की परंपरा के बीच सैलाना में मानवता और समाजसेवा की एक अनूठी मिसाल सामने आई है। भूरामल कॉलोनी निवासी 72 वर्षीय परशुराम पंवार ने देहदान का संकल्प लेकर क्षेत्र में पहली बार इस दिशा में पहल की है। डिप्लोमा मैकेनिकल इंजीनियर पंवार के इस निर्णय से मृत्यु के बाद भी उनकी पार्थिव देह मेडिकल विद्यार्थियों के अध्ययन और चिकित्सा शिक्षा के काम आएगी। उनका यह संकल्प समाज को मानव सेवा और परोपकार का संदेश दे रहा है।
परशुराम पंवार का जन्म कर्नाटक के बागलकोट में हुआ था। इसके बाद वे गोवा और मध्यप्रदेश के राऊ में रहे तथा वर्तमान में सैलाना में निवासरत हैं। वे पत्रकार मनोज भंडारी के ससुर हैं और बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं।
परिवार की सहमति से लिया ऐतिहासिक संकल्प
देहदान के इस संकल्प को विधिवत रूप देने के लिए काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के सचिव गोविंद काकानी अपने मित्र विपिन श्रीमाल के साथ सैलाना पहुंचे। परिवारजनों, मीडिया साथियों और नगर के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में देहदान का संकल्प पत्र भरवाकर पंजीयन की प्रक्रिया पूरी की गई।
इस दौरान गोविंद काकानी ने देहदान की प्रक्रिया, उसके महत्व और चिकित्सा शिक्षा में इसकी उपयोगिता की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देहदान से प्राप्त पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेजों में विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना समझने और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने में मदद करता है। एक पार्थिव देह का उपयोग मेडिकल विद्यार्थियों के अध्ययन में लगभग पांच वर्षों तक किया जा सकता है।
मृत्यु के बाद भी जीवित रहेगी सेवा की भावना
काकानी ने शासन की ओर से देहदान करने वाले व्यक्ति को दिए जाने वाले सम्मान की जानकारी देते हुए बताया कि मृत्यु के बाद मेडिकल कॉलेज की टीम पार्थिव देह लेने पहुंचती है। इस दौरान पुलिस विभाग द्वारा सम्मानपूर्वक गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने की व्यवस्था भी बताई गई।
परशुराम पंवार ने यह संकल्प अपनी पत्नी रंजना पंवार, पुत्र मंजूनाथ और पुत्रियों वैशाली व वंदना की सहमति से लिया। देहदान संकल्प पत्र डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे मेडिकल कॉलेज, रतलाम के शरीर रचना विभागाध्यक्ष राजेंद्र सिंगरौले के माध्यम से डीन डॉ. अनीता मूथा द्वारा परिवार को सौंपा जाएगा।
इस अवसर पर धर्मेन्द्र शिकारी, मोतीलाल मालवीय, गोपाल कुमावत, पप्पी मिश्रा, अशोक क्षोत्रिय सहित नगर के पत्रकार, गणमान्य नागरिक और परिवारजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में मनोज भंडारी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
परशुराम पंवार का यह संकल्प इस संदेश को मजबूत करता है कि देहदान के माध्यम से मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा की जा सकती है और आने वाली पीढ़ियों के चिकित्सकों को सीखने का अवसर दिया जा सकता है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत