रतलाम। विद्यार्थियों से शिक्षा और विभिन्न गतिविधियों के नाम पर शुल्क वसूलने वाले निजी स्कूलों की जिम्मेदारी केवल फीस लेने तक सीमित नहीं हो सकती। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ अपनी प्रतिभा निखारने और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना भी स्कूल की जिम्मेदारी है। लेकिन श्री गुरु तेग बहादुर एकेडमी को लेकर सामने आया मामला अब इसी जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
आरोप है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा विद्यार्थियों से खेल के नाम पर वार्षिक शुल्क सहित अन्य मदों में राशि तो ली जाती है, लेकिन स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) की निर्धारित फीस जमा नहीं किए जाने के कारण विद्यार्थियों को शासन की खेल प्रतियोगिताओं में आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।
मामला तब गंभीर हो गया जब एकेडमी के विद्यार्थी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए हिमालय स्कूल पहुंचे, लेकिन SGFI शुल्क जमा नहीं होने की बात सामने आने के बाद उन्हें प्रतियोगिता में शामिल किए बिना वापस लौटना पड़ा। बताया जा रहा है कि बच्चे प्रतियोगिता में खेलने की उम्मीद लेकर पहुंचे थे, लेकिन उन्हें मैदान में उतरने का अवसर तक नहीं मिला। इस घटनाक्रम से विद्यार्थियों और अभिभावकों में नाराजगी है।
जिला खेल अधिकारी का बयान बढ़ाता है मामले की गंभीरता
मामले में जिला खेल अधिकारी दीपेंद्र ठाकुर से जानकारी ली गई। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि गुरु तेग बहादुर एकेडमी द्वारा पिछले करीब दो वर्षों से SGFI की फीस जमा नहीं की गई है। ठाकुर के अनुसार उन्हें पदभार संभाले डेढ़ वर्ष से अधिक समय हो चुका है और इस अवधि में संस्था की ओर से SGFI शुल्क जमा नहीं कराया गया। फीस जमा नहीं होने की स्थिति में नियमानुसार विद्यार्थियों को संबंधित आगे की प्रतियोगिताओं में शामिल नहीं किया जा सकता।
जिला खेल अधिकारी ने यह भी कहा कि यदि स्कूल प्रबंधन का दावा है कि SGFI की फीस जमा की गई है तो उसे शिक्षा विभाग की रसीद अथवा संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए।
क्लस्टर और SGFI के बीच विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल
भाजपा नेता यतेंद्र भारद्वाज का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा विद्यार्थियों को क्लस्टर प्रतियोगिताओं में खेलने की बात कही जाती है, जबकि शासन की SGFI आधारित प्रतियोगिताओं में भागीदारी विद्यार्थियों को जिला, संभाग, राज्य और स्कूल नेशनल स्तर तक अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देती है।
भारद्वाज ने सवाल उठाया कि यदि अन्य CBSE स्कूल विद्यार्थियों को शासन की खेल प्रतियोगिताओं में अवसर उपलब्ध करा रहे हैं तो गुरु तेग बहादुर एकेडमी के विद्यार्थियों को इस अवसर से क्यों वंचित किया जा रहा है? उन्होंने मामले में शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
अब प्रशासन के सामने खड़े हैं ये बड़े सवाल
मामले ने शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या विद्यार्थियों से खेल के नाम पर ली जाने वाली फीस का पूरा उपयोग खेल गतिविधियों और प्रतियोगिताओं में किया जा रहा है? SGFI की फीस आखिर क्यों नहीं जमा की गई? पिछले वर्षों की फीस की स्थिति क्या रही? यदि फीस जमा की गई थी तो उसकी रसीद कहां है? और यदि फीस जमा नहीं हुई तो विद्यार्थियों को इसकी जानकारी समय रहते क्यों नहीं दी गई?
भारद्वाज ने संकेत दिया है कि पूरे मामले में सूचना के अधिकार के माध्यम से दस्तावेज और शुल्क संबंधी जानकारी जुटाई जाएगी तथा तथ्य सामने आने के बाद आगे कार्रवाई की मांग की जाएगी।
अब निगाहें शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन और खेल विभाग पर हैं। क्योंकि मामला केवल फीस का नहीं, बल्कि उन विद्यार्थियों के भविष्य का है जो मैदान में अपनी प्रतिभा साबित कर जिला से लेकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सपना देखते हैं। प्रशासन यदि मामले को गंभीरता से लेता है तो स्कूल की SGFI सदस्यता, फीस भुगतान, विद्यार्थियों से वसूले गए खेल शुल्क और प्रतियोगिताओं में उनकी वास्तविक भागीदारी की दस्तावेजी जांच पूरे विवाद की तस्वीर साफ कर सकती है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत