रतलाम। श्रमिकों और कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर सोमवार को रतलाम में भारतीय मजदूर संघ के आह्वान पर जोरदार धरना-प्रदर्शन एवं ज्ञापन आंदोलन आयोजित किया गया। भारतीय मजदूर संघ के देशव्यापी एक दिवसीय आंदोलन के तहत बड़ी संख्या में कर्मचारी कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। यहां कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) तरुण जैन को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर वर्षों से लंबित मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग की।
आंदोलन में मध्यप्रदेश शिक्षक महासंघ सहित भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध विभिन्न संगठनों के जिला पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य, ब्लॉक पदाधिकारी और बड़ी संख्या में शिक्षक एवं कर्मचारी शामिल हुए।
कर्मचारियों ने कहा कि प्रदेश के संगठित एवं असंगठित क्षेत्र, शासकीय एवं निजी क्षेत्र, नियमित, संविदा, आउटसोर्स, दैनिक वेतनभोगी, अंशकालीन कर्मचारी और पेंशनरों की अनेक न्यायोचित मांगें लंबे समय से शासन स्तर पर लंबित हैं। पूर्व में भी 17 नवंबर 2025 को मांगों को लेकर ज्ञापन दिया गया था, लेकिन अपेक्षित निराकरण नहीं होने के कारण पुनः आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
आउटसोर्स और दैनिक वेतनभोगियों के लिए ठोस नीति की मांग
ज्ञापन में वर्षों से विभागों में सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए ठोस नीति अथवा निगम-मंडल बनाए जाने, उन्हें 62 वर्ष तक सामाजिक सुरक्षा एवं रोजगार की सुरक्षा देने तथा वेतन एवं श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की गई। वहीं 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके दैनिक वेतनभोगियों को नियमित, विनियमित अथवा स्थाई कर्मी घोषित कर अनुकंपा नियुक्ति, उपादान, अवकाश नकदीकरण और सातवें वेतनमान सहित अन्य हितलाभ देने की मांग रखी गई।
शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों की आवाज भी बुलंद
स्कूल शिक्षा विभाग को लेकर संगठन ने लंबे समय से कार्यरत अतिथि शिक्षकों की सेवा 62 वर्ष तक निरंतर रखने, पात्र एवं अनुभवी अतिथि शिक्षकों को भर्ती में उनके कार्य वर्षों के आधार पर बोनस अंक का लाभ देने तथा उनका भविष्य सुरक्षित करने की मांग उठाई। निःशुल्क भोजन योजना के रसोइयों का मानदेय बढ़ाकर 10 हजार रुपये प्रतिमाह करने, योजना का निजीकरण समाप्त करने तथा दुर्घटना की स्थिति में उपचार और मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
इसके अलावा वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता से छूट देने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
संविदा कर्मचारियों से लेकर पंचायत सचिवों तक मांगें
संगठन ने संविदा नीति 2023 को सभी विभागों में लागू करने, 10 वर्ष के अनुभव वाले संविदा कर्मचारियों को सीधे नियमित करने, अनुकंपा नियुक्ति, ग्रेच्युटी, एनपीएस एवं अवकाश जैसी सुविधाएं देने की मांग की। पंचायत सचिवों को समयमान वेतनमान, विभाग में संविलियन, आयुष्मान योजना, 20 लाख रुपये तक बीमा तथा पंचायत समन्वयक अधिकारी के पद पर पदोन्नति देने की मांग भी रखी गई।
कृषि क्षेत्र के कर्मचारियों और मजदूरों के हित में भी उठी आवाज
कृषि विभाग में आत्मा परियोजना के अंतर्गत वर्ष 2013 से 2019 तक कार्यरत किसान मित्र-दीदी की सेवा बहाली, कृषि उपज मंडियों में वर्षों से कार्यरत तुलावटियों को चक पद्धति से ड्यूटी एवं पारिश्रमिक की व्यवस्था, हम्माल-तुलावटियों को संबल योजना का लाभ और हम्मालों से 50 किलोग्राम से अधिक वजन नहीं उठवाने की मांग की गई। शिक्षित एवं योग्य हम्मालों और तुलावटियों को मंडी में रिक्त पदों पर अवसर देने की मांग भी रखी गई।
आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य, ऊर्जा और राजस्व कर्मचारियों की मांगें भी शामिल
ज्ञापन में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर पद पर पदोन्नति में आयु सीमा हटाने, 50 प्रतिशत पदों पर विभागीय पदोन्नति, सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने तथा सामान्य मृत्यु के मामलों में भी 1.25 लाख रुपये अनुदान देने की मांग की गई।
स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्टों के लिए केंद्र सरकार के सेवा विनियम लागू करने, उपस्वास्थ्य केंद्रों में फार्मासिस्ट के पद सृजित करने तथा आशा कार्यकर्ताओं एवं सुपरवाइजर के मानदेय में प्रतिवर्ष एक हजार रुपये वृद्धि की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
ऊर्जा विभाग के आउटसोर्स कर्मचारियों को अनुभव के आधार पर भर्ती में प्राथमिकता,
जोखिमपूर्ण कार्य करने वालों को 3 हजार रुपये मासिक जोखिम भत्ता, ठेकेदार एजेंसी को हटाकर कंपनी से सीधे वेतन भुगतान तथा लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के लिए पारदर्शी उन्नयन नीति बनाने की मांग की गई।
राजस्व विभाग के पटवारियों का ग्रेड-पे 2100 से बढ़ाकर 2400 रुपये करने, कोटवारों के मानदेय में वृद्धि तथा उनकी सेवा भूमि से जुड़े अधिकारों को बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
कर्मचारी हितों पर सरकार से निर्णायक कदम की मांग
भारतीय मजदूर संघ ने राज्य कर्मचारियों की 70, 80 और 90 प्रतिशत स्टायफंड व्यवस्था समाप्त कर 100 प्रतिशत वेतन देने, कर्मचारियों की ग्रेच्युटी सीमा केंद्र के समान 25 लाख रुपये करने, स्वास्थ्य बीमा लागू करने तथा विभिन्न विभागों की वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग की।
आंदोलन में भारतीय मजदूर संघ रतलाम जिला अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा, जिला मंत्री दिलीप पाटीदार, मध्यप्रदेश शिक्षक महासंघ जिला अध्यक्ष चरण सिंह चौधरी, जिला महासचिव नरेंद्र सिंह जाट, जिला कोषाध्यक्ष वीरेंद्र कुमार दामा सहित जिला कार्यकारिणी, ब्लॉक अध्यक्ष, ब्लॉक कार्यकारिणी और बड़ी संख्या में शिक्षक एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
कर्मचारियों ने कहा कि यह आंदोलन केवल ज्ञापन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्षों से लंबित कर्मचारी एवं श्रमिक हितों की मांगों को सरकार तक मजबूती से पहुंचाने का प्रयास है। संगठन ने प्रदेश सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र निर्णय लेने और कर्मचारियों को उनका अधिकार दिलाने की मांग की।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत