मंदसौर/भोपाल। मध्यप्रदेश के पटवारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आज से प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। म.प्र. पटवारी संघ ने सरकार पर वर्षों से लंबित मांगों की लगातार अनदेखी और वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
संघ द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार सरकार ने राजस्व विभाग के कर्मचारियों की कई मांगों पर समय-समय पर निर्णय लिए, लेकिन पटवारी संवर्ग की समस्याओं का अब तक समाधान नहीं किया गया। इससे पूरे प्रदेश के पटवारियों में भारी आक्रोश है। संघ का कहना है कि बार-बार ज्ञापन, चर्चा और शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद सरकार ने कोई ठोस पहल नहीं की।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 8 जुलाई 2026 को प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा गया था। इसमें प्रमुख मांगों में ग्रेड-पे एवं वेतन विसंगति का निराकरण, टाइम स्केल वेतनमान, नायब तहसीलदार पद पर विभागीय भर्ती, पदोन्नति, लंबित वित्तीय लाभों का भुगतान तथा अन्य सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान शामिल था। संघ का आरोप है कि निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद सरकार की ओर से कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया।
इसके बाद प्रदेश के पटवारियों ने 15 जुलाई से 19 जुलाई तक सामूहिक अवकाश लेकर विरोध दर्ज कराया तथा 20 जुलाई से 2 अगस्त तक चरणबद्ध आंदोलन चलाया। इस दौरान सभी तहसीलों में ज्ञापन सौंपे गए और सरकार से तत्काल निर्णय लेने की मांग की गई। बावजूद इसके समाधान नहीं निकलने पर अब आंदोलन को और तेज करते हुए 3 अगस्त से प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी गई है।
संघ के निर्देशानुसार सभी पटवारी अपने-अपने तहसील मुख्यालयों पर एकत्र होकर कार्यालयीन कार्यों का बहिष्कार करेंगे। 4 अगस्त से जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन भी किया जाएगा। संघ ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन के दौरान पटवारी किसी भी प्रकार का ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन शासकीय कार्य नहीं करेंगे।
म.प्र. पटवारी संघ की जिला शाखा मंदसौर के जिलाध्यक्ष अंतिम चौला भार्गव ने कहा कि सरकार यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने प्रदेश के सभी पटवारियों से एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया है।
इस हड़ताल का सीधा असर नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, फसल गिरदावरी, राजस्व अभिलेखों के संधारण तथा आम नागरिकों से जुड़े अनेक राजस्व कार्यों पर पड़ने की संभावना है। अब सभी की नजर सरकार और पटवारी संघ के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी हुई है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत