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भीलवाड़ा। उपनगर पुर कस्बे के प्राचीन श्री लक्ष्मीनाथ भगवान मंदिर को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश एक बार फिर सामने आया है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री एवं तहसीलदार के नाम ज्ञापन सौंपकर मंदिर के तत्काल जीर्णोद्धार, ट्रस्ट के आय-व्यय की निष्पक्ष जांच, ट्रस्ट के पुनर्गठन तथा मंदिर की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले लगभग 15 वर्षों से ट्रस्ट के पदाधिकारी एक ही पदों पर बने हुए हैं। इस दौरान कई बार मंदिर निर्माण कार्य, आय-व्यय का विवरण और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को सार्वजनिक करने की मांग उठाई गई, लेकिन हर बार आश्वासन देकर मामला टाल दिया गया। उनका कहना है कि नियमानुसार ट्रस्ट का लेखा-जोखा समय-समय पर सार्वजनिक होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर की हालत लगातार जर्जर होती जा रही है। उनका कहना है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी अपने दौरे के दौरान मंदिर की स्थिति पर चिंता व्यक्त की थी और विकास की बात कही थी, लेकिन वर्षों बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मंदिर का जीर्णोद्धार नहीं कराया गया और कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि श्री लक्ष्मीनाथ भगवान देवभूमि के नाम लगभग 83 बीघा भूमि दर्ज है, जिस पर कथित रूप से भू-माफियाओं का कब्जा है। ग्रामीणों ने सरकार से भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों ने वर्तमान ट्रस्ट की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच, वित्तीय लेन-देन का ऑडिट तथा ट्रस्ट का पुनर्गठन कर समाज के विभिन्न वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देने की भी मांग की, ताकि मंदिर का विकास पारदर्शी और जनभागीदारी के साथ हो सके। ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष मौजूद रहे। इनमें संजय पारीक, देवीलाल तेली, भंवरलाल जाट, मंगलेश्वर राजौरा, अर्जुन (पंडित) त्रिवेदी, सुरेंद्र धाकड़, रतनलाल सेन सहित अनेक ग्रामीण शामिल थे। सवाल जो उठ रहे हैं... - आखिर ग्रामीणों को अपनी ही आस्था के केंद्र के लिए बार-बार आंदोलन करने की नौबत क्यों आ रही है? - यदि मंदिर की स्थिति वर्षों से जर्जर है, तो अब तक जीर्णोद्धार क्यों नहीं कराया गया? - ट्रस्ट का आय-व्यय और लेखा-जोखा सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? - 83 बीघा देवभूमि पर यदि अतिक्रमण है, तो प्रशासन की कार्रवाई अब तक क्यों नहीं हुई? - क्या सरकार और संबंधित विभाग इस बार ग्रामीणों की मांगों पर ठोस निर्णय लेकर वर्षों पुराने विवाद का समाधान करेंगे, या फिर यह आंदोलन भी केवल आश्वासनों तक सीमित रह जाएगा? रिपोर्ट : राजकुमार जी गोयल |